विज्ञापन

ये रिश्ता

                
                                                                                 
                            अब इस रिश्ते को एक नाम दे देना चाहिए
                                                                                                

बोहोत धड़क लिया तुम बिन अब इस दिल को आराम कर लेना चाहिए
बात तेरे दिल की है तो बस मेरे दिल तक आनी चाहिए
ना तुम्हे इस पैगाम को सर -ए -आम कर देना चाहिए
जो तुम बात करते करते अपनी जुल्फें सवार लेती हो
नाचीज के लिए अब तुम्हे इन अदाओ को छोड़ देना चाहिए
मुझसे मिल कर भी अगर तुम प्यासे लौट आए
हमें अब तुम्हारी खातिर इन दरिआओ का रुख मोड़ देना चाहिए
अपने आंखो में तुझे सवारता हुआ देखने की आरजू है
मेरी मानो तो तुम्हे ये शीशा तोड़ देना चाहिए
आपने जिस्मों पे कुछ रंग भी डाल लो
अब तुम्हे कोस ओ कजाहो का गुरूर तोड़ देना चाहिए

इन दीवारों को गिरा देना चाहिए
इन बेड़ियों को तोड़ देना चाहिए
तुम्हे चाहिए की अब हमारे नजदीक आओ तुम
अब तो तुम्हे हम पे ऐतबार कर लेना चाहिए
इन नज्मों को तुम्हारे होठों से उतरता देखना चाहता हु
अब तो तुम्हें कुछ बोल देना चाहिए ।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
8 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X