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मोह भंग

                
                                                                                 
                            धू-धू दहकती देह को घेरे
                                                                                                

परिजनों का झुमटा –
संबंधी, पड़ोसी और कुछ मित्र
दिवंगत का सकल संसार यहीं तक सिमटा l

भीड़ से अलग किनारे खड़ा सब बाँच रहा
कौन आया, कौन नहीं, हिसाब आंक रहा
कभी मुखबिर सा किसी टोली में जा खड़ा होता
क्या कह रहे परलोकी की पीठ पीछे इसकी टोह लेता l

दुखी से हैं सब, चेहरों को बाँच यूं लगता
मन को जांचा तो जाना कुछ और ही है विपदा

कोई दुकान-बिजनेस नाकाबिल-भरोसे छोड़ आया
कोई बिन छुट्टी दफ्तर से था चल निकला l
कोई आया दूर शहर से घर लौटने की फिक्र में घिरा खड़ा
कोई कौसे शाम के न्योते के रंग में हाय यह कैसा भंग पड़ा l

बहुतों को पढ़ बस यही पाया
हर कोई किसी मजबूरी-वश है चला आया
रिश्तेदारी के जाल में फंसा या
पुरानी पहचान के तकाजे इस भीड़ में आ समाया l
परिवार जन भी जुटे हैं मानों दुनियादारी ही निभाने
बिरादरी को अपना बस चेहरा भर दिखाने l

कुछ नजदीकी रिशतेदारों के चेहरे अनाथ परिवार की
ज़िम्मेदारी का मुखौटा ओढ़े दिखे, रस्मी वादे दुहराते
इधर अपनी औलाद के मन में भी अस्पताल के खर्चे
और पेंशन-ग्रैचुइटी के ही खुले पड़े थे बही-खाते l

उधर मंत्र पड़ता पंडित, दुशाले समेट
उनका मूल्य था तौल रहा
और इस आँकड़े को संभावित
दक्षिणा से था जोड़ रहा l

कतार बाँध, हाथ जोड़ खड़े हो गए अब धन्यवाद करते
सब निकट संबंधी, प्रचंड होती ज्वाला के ताप के चलते l

उद्घोषणा की पंडित ने: तीसरे दिन लौटना है
फूल चुनने और चौथा होगा घर पे
मैं भी इस भीड़ मे जा खड़ा हुआ
और हाथ जोड़ सबसे विदा ले आया l

मोह भंग हुआ, टूटा सब लोकिक अपनों से नाता
अपने मरे अस्तित्व में फिर से लौटा तो देखा वो जो भुला दिया,
भस्मा दिया, अकेला पड़ा तिड़क-तिड़क था मुझे बुला रहा
मेरा जिस्म ज्यों फिर से मुझमें समाने को था अकुला रहा l

सब चल दिये पर मुझे तो कहीं नहीं जाना
अब तो यहीं बचा घर-बाहर और अंतिम ठिकाना l

सोचता हूँ किसी पेड़ पर जा जमूँ या फिर
श्मशान का कोई भीतरी कोष्ठ खोजूँ और यहीं रम जाऊं;
अपनी राख़ के गर्म आगोश में सिमट
एक रात और चेन से सो जाऊँ l

मन में आया तो हो आऊँगा
उस घर भी अपने चौथे पर
यही देखने कि कौन आया, कौन नहीं –
भला कौन-कौन था थोड़ा सा अपना l

ई-602, पंचशील अपार्टमेंट्स,
प्लॉट 24, सैक्टर 4, द्वारका,
नई दिल्ली -110078
[email protected]

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1 year ago

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