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अपने दिल से

                
                                                                                 
                            अपने दिल से लगा भी सकते हैं।
                                                                                                

तेरे नज़दीक आ भी सकते हैं ।।

कोई परदा नहीं है तुझसे मेरा ।
अपनी नज़रें झुका भी सकते हैं।।

ज़िन्दगी तुझसे है मेरे हमदम ।
ये हक़ीक़त छुपा भी सकते हैं ।।

रौनकें कम नहीं है चाहत की ।
अपना चेहरा दिखा भी सकते हैं ।।

बस तेरी एक ख़ुशी के लिए ।
अपनी खुशियाँ लुटा भी सकते हैं ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद
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1 month ago

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