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मुझको फिर बचपन लौटा दे

mujhko phir bachpan lauta de
                
                                                                                 
                            जगा रहा मैं आज रात भर,
                                                                                                

नींद ना मुझको आई मां।
बीते बचपन की यादों में,
आंखे ये भर आई मां ।
मां वो लोरी फिर से सुना दे,
मुझे चैन की नींद सुला दे।।
कंटकयुक्त राह जीवन की
चलना नंगे पांव है मां,
बहुत थक गया चलते-चलते
दूर अभी भी गांव है मां,
मां अपना आंचल लहरा दे
मुझको उसकी छांव दिला दे।।
घूर रही है सारी दुनियां
बहुत बुरी नजरों से मां,
जल ना जाए कहीं जिंदगी
इन काले बज्रों से मां,
मां तू काला टीका लगा दे
मुझको इन नजरों से बचा ले।।
बहुत व्यग्र हूं, बहुत दुखी हूं
आंखों में पानी है मां,
है निराश मन,धुंध है छाई
मुसीबतें आनी हैं मां,
मां तू सिर पर हाथ फिरा दे
मेरे दुःख को दूर भगा दे।।
जहां ना चिंता किसी बात की,
और ना ही कोई चाह थी मां,
हंसना-रोना,बस खुश रहना
बहुत सरल वह राह थी मां,
मां बस अब गोदी में सुला दे,
मुझको फिर बचपन लौटा दे,
मुझको फिर बचपन लौटा दे ।

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1 month ago

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