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पर्वत सा तटस्थ बहती हवा की रवानी सा बन जाऊं

                
                                                                                 
                            पर्वत सा तटस्थ
                                                                                                

बहती हवा की रवानी सा बन जाऊं!

लहरों सा चंचल
दरिया के निर्मल पानी सा बन जाऊं!

अरमां मेरे ऐसे के
पीरी में अपनी जवानी सा बन जाऊं!

किसी गैर की नहीं
ख़ुद अपनी ही कहानी सा बन जाऊं!

पर्वत सा तटस्थ
बहती हवा की रवानी सा बन जाऊं!

- बशर
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1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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