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शेष ही रहने दे

                
                                                                                 
                            कितना समझाया था ना किसीने ,
                                                                                                

खुद को ना बिकने दे कौडीमोल ,
रहने दे खुद पर भी तो ऐतबार ,
शेष रहने दे थोडा सा करार !
ना बांध किसीसे उम्मीद की डोर ,
परछाई की लपटे बस चारों और ,
नहीं यहाॅं कोई तुझे चाहनेवाला ,
मतलबी लोगों का है बोलबाला !
क्युॅं जज्बातों को किया है जाया ,
सुकून का खजाना है जो खोया ,
पछताए कहाॅं लौटे तेरे सपने ,
ख्बाब ही बनकर रहे कितने !
अभी रहने दे शेष ही लिखना ,
तेरे हाल क्या समझे जमाना ,
दर्द और आंसू ही है बहाना ,
कौनसा आता है चैन कमाना !

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3 months ago

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