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आज का दहेज

                
                                                                                 
                            कितना महंगा दिया है किसी ने आज दहेज ,
                                                                                                

बचपन से जवानी तक का साथ दिया है सहेज
पेट काट काटकर किया गुजारा दिया है सारा ,
हंसता गूंजता दिल का खिलौना दिया है प्यारा !
नन्ही नन्ही सी चाही चाही सी उम्मीदें ,
चाशनी से मिठी छोटी सी फरमाइशी ,
स्कूल बैग ,नोटबुक ,मनचाहे सफर ,
एक झटके में पैक कर लगाया स्टीकर !
छम छम बजती ओ तेरी पायल की झंकार ,
रोते देख तुझे मन को रखता जीवन बेकार ,
गिरने पर चोट लगने का वो अनजाना डर ,
देखूं तुझे यूं ही बेवजह मैं आंखें भर भर !
तितलियों सा तेरा बचपन दिया मैंने बांध ,
जवानी संग गुजारी जो तेरी वह सांझ ,
दिल निकाल के दिया मेरा अरमानों से भरा ,
तेरे संग ससुराल चला जहां मेरा पूरा !
वह मुस्कुराते सपने ,तेरी नाराज नाराज राते ,
भरी दोपहर में प्यार से भरी तूने वह सुबहे ,
छोटी-छोटी बातों पर मठ्ठे उठती रेखाएं ,
तूने अनजाने ही बातें मुझे इतनी सिखाई !
बड़ा भारी भारी है ये जो दिया दहेज का खजाना ,
सोच समझकर ही इसे धीमे धीमे इस्तेमाल करना ,
देखना ना छूटे इसका एक भी सिरा ,
भरा पूरा है ए मेरे जीवन का मेला !
थोड़ा थोड़ा संभल जाना इतना कुछ मुझसे ,
दहेज का अगला खजाना बना लेना अपने से ,
मुझसे जुदा सा कुछ अपना सा ढूंढना ,
खाली खाली ना रहे तेरे दहेज का खजाना !

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3 months ago

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