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मेरे अल्फाज

                
                                                                                 
                            झुका के अपने दो नयन,
                                                                                                

हार गई मैं अपना तनमन,
किसी मासूम बच्चे सी मैं,
तरस गई मैं होने को मिलन !
वही था बस मेरी किरण,
हर अंधेरे को दूर करता,
सूरज का नूर भी कभी,
उससे मिलन को तरसता!
कौन अनुराग दिल में छिपाए,
पहुंची हुं मैं खुद से भी छिपते ,
कबुल करे वो रब मेरी दुआ,
झोली में डाल दे मेरा खुदा!
वो मेरे दिल का सुखचैन,
वो मेरे जहां का मधुबन,
बह जाऊ ना लहरों संग,
वो बस मुझे थामे साहिल!
 
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3 months ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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