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रिश्तों का जायका

                
                                                                                 
                            लगा दो ना थोडा थोडा ,
                                                                                                

उसमें प्यार का तडका ,
कितना बढिया सजा है ,
खाने का मजेदार जायका ।।
है इसमें सजी निम्बू मिर्च ,
दिखती सूरज की लाली ,
इसमें है प्यारा सांबर ,
हो जैसे इक अंबर ।।
बीच में रखा शाही पुलाव ,
खाके बने जैसे हम नवाब ,
रसगुल्ले की मिठी चाशनी ,
खाने को मिलती बर्फी मिठाई ।।
पराठा के स्वाद का क्या कहना ,
एक से एक बढ़कर ही गहना ,
मूली ,प्याज, आलू जाने कितने ,
कहा तक बैठे ऊँगली पे गिनने ।।
पापड है स्वादिष्ट कुरकुरा सा ,
साथ में रखे है नमकीन सभी ,
थोडा ,थोडा है भूरभूरा नमक ,
देखी क्या ऐसी थाली कभी ।।
कटोरे में अलग अलग सब्जी ,
खावो जितनी हो अपनी मर्जी ,
ऐसी होती जिंदगी की भी ,
सजी हुँवी खट्टी मिठी थाली ।।
चुटकीभर नमक जितने आँसू ,
कटोरे कटोरे भर होती खूशियाँ ,
नमकीन जैसे होते सारे अपने ,
निम्बू मिर्च सी होती लड़ाई ।।
पराठों जैसे होते दोस्त ,
मिठाईयों से होते रिश्ते ,
सांबर सा खट्टा मीठी सा प्यार ,
वक्त भी फिर होता अपना यार ।।
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3 months ago

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