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इंसान को सिरजने वाला है मन

                
                                                                                 
                            इंसान को सिरजने वाला है मन,
                                                                                                

जीवन की नईया का आधार है मन,
सच्ची बातों के पीछे कम,
और गलत बातों से जल्दी,
बहल जाता है मन,
सब कुछ समझ कर भी अनजान,
होने का फर्ज निभाता है मन,
एक डाल पर नहीं टिक पाता है मन,
डाल डाल पर मंडराता है मन,
किसी की दो प्यारी बातों,
से बहल जाता है मन, वैसे तो,
मन एक मंदिर के,
समान होता है,
जिस पर काबू रखना,
इंसान का काम होता है।।

सीमा सूद

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4 months ago

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