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तय था कि मुहौब्बत सिर्फ दिल से होगी

                
                                                                                 
                            वो हमसे खूब गले मिले हैं बार-बार
                                                                                                

जिनकी ठोकरों से हम गिरे बार बार

उनके मुस्कुराने का अदब भी देखिए
छुपे छुपे राज और ये मुस्कान बार बार

मुल्क की तारीख़ उठाकर तो देखिए
कौन काबिज़ रहे सियासत में बार बार

यह वास्ता एक अर्से एक उम्र का नहीं
वो सदियों से राज करते हैं बार बार

ये तो नहीं हैं आज़ादी के मायने मंज़र
तुम शहंशाह और हम ग़ुलाम बार बार

कैसे हमराह हमसफ़र हमराज हो मेरे
तुम असमां में हो, हम गर्त में बार बार

खूब देखा है मैंने उन कलियों को खिलते
जिन्हें तुम बेरहमी से नोच लेते बार बार

मसला शिद्दत ओ हौसला ए मक़सद का है
मेरी केाशिशों को हल्के में न लो बार बार

तय था कि मुहौब्बत सिर्फ़ दिल से होगी
क्यों मेरे कुर्ते के पैबन्द गिनते हो बार बार

रईशी-फ़कीरी का फ़र्क मालूम नहीं हमें
खाली हाथ आऐ, खाली हाथ गये बार बार

ज़ुल्म के खिलाफ़ हम न आँखें बंद करेंगे
झोंक लो तुम चाहे कितनी गर्द बार बार

मैं खुद हकीम हूँ अपने रूहानी जख्मों का
तुम क्यों मेरे मरहम सहलाते हो बार बार

हमें बेमक़सद समझने की गफ़लत ना करो
हमने हासिल किये हैं कई मुकाम बार बार।
-श्रीधर
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2 months ago

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