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अपना बनाना रह गया

                
                                                                                 
                            जिन्दगी गुजरती रही, अपना बनाना रह गया।
                                                                                                

कोशिशें अब भी जारी, आना जाना रह गया।
जिस रास्ते हम चले, उसे ही सही मानते रहे।
लोग आते जाते रहे, बस साथ चलना रह गया।
जो लकड़ियाँ चुन के लाये, वह गीली निकली।
घर धुआँ से भर गया, बाहर निकलना रह गया।
आँखो से आँसू बहे, सांसो में घबडाहट बढी।
'उपदेश' अधूरे रह गये, दम निकलना रह गया।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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1 month ago

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