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देश भक्ति

                
                                                                                 
                            अब न बिक पायेंगी, दौलत हमारी।
                                                                                                

औलादें सम्भालेंगी, प्रॉपर्टी हमारी।
देश भक्ति पर, बडा जोर चल रहा।
अपनी आमद को, टैक्स लेते भारी।
हमको नहीं पूछते, जिंदा या मर गये।
बड़ी फायदे की, योजनाएं रहीं जारी।
'उपदेश' सुन सुनकर, तबियत पकी।
अब भूख को, नहीं जरूरत तुम्हारी।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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1 month ago

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