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तन्हा रात का डर

                
                                                                                 
                            तन्हा रात का डर, लगता छुपा कोई इधर।
                                                                                                

उठ उठकर देखती रही, और हो गई सहर।

आने को बैठा, दिल की धडकनों का राजा।
उसका इंतजार कर करके, गुजरी गई पहर।

हंसने हंसाने का मुहूर्त, ऐसे वैसे गुजर गया।
'उपदेश' ना आया, बस इसी बात का है डर।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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1 month ago

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