लागा गोरी गुजरिया....दिलीप साहब की गंभीर आंखें, अभिनय की संजीदगी तिस पर भोजपुरिया अंदाज 

लागा गोरी गुजरिया....दिलीप साहब की गंभीर आंखें, अभिनय की संजीदगी तिस पर भोजपुरिया अंदाज
                
                                                             
                            लागा गोरी गुजरिया से नेहा हमार
                                                                     
                            
होइ गवा सारा चौपट मोरा रोजगार

नैन लड़ जैंहे तो मनवा में कसक होइबे करी
प्रेम का छुटिहैं पटाखा तो धमक होइबे करी
नैन लड़ जैंहे …


खेत में काम करने वाला एक मजदूर जिसके चेहरे पर एक अनगढ़ मासूमियत तैर रही होती है, अपने दोस्तों के साथ ठेठ-देशी ठुमके के साथ 'नैन लड़ जइहैं...' की तान छेड़ता है और तब तक गाता रहता है, जब तक उसकी प्रेमिका सामने नहीं आती है। खालिस भोजपुरिया अंदाज लिए वह नौजवान मोहब्बत में फना हो जाने वाला प्रेमी है, जिंदादिल और नेक इंसान। अपनी प्रेमिका को लंपट सूदखोर साहूकार के चंगुल से बचाने की कोशिश में डाकू बन जाता है और आखिरकार पुलिस में भर्ती हो चुके अपने ही भाई की गोली का शिकार हो जाता है।  

जी हां, मैं बात कर रहा हूं भारतीय अभिनय जगत के 'ट्रेजडी किंग' कहे जाने वाले, अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और संवाद अदायगी के लिए मशहूर हो चुके महान अभिनेता दिलीप कुमार की। जीवन के 96 सावन देख चुके दिलीप साहब ने अपनी इस लंबी यात्रा में देश और दुनिया को बहुत कुछ दिया है।   आगे पढ़ें

4 months ago

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