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हसरत जयपुरी : याद किया दिल ने कहां हो तुम

death anniversary of lyricist hasrat jaipuri
                
                                                                                 
                            
शीर्षक गीत लिखने के लिए प्रसिद्ध हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल 1918 को हुआ था। इनका वास्तविक नाम इक़बाल हुसैन है। इनका करियर एक बस कंडक्टर के रूप में शुरू हुआ इसके बाद वह मुशायरों में भी शिरकत करने लगे। एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनको सुना और अपने बेटे राजकपूर से हसरत जयपुरी से मिलने की बात कही। और राज कपूर से मिलने के बाद उन्होंने बरसात फ़िल्म का गाना 'जिया बेकरार है छाई बहार है आजा मोरे बालमा तेरा इंतज़ार है' लिखा तथा इस गाने की धुन शंकर जयकिशन ने बनायी। इस फ़िल्म से शंकर जयकिशन भी अपना कैरियर शुरू कर रहे थे। यह गाना बहुत हिट हुआ और इसके बाद हसरत साहब रुके नहीं।


बरसात की कामयाबी के बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी और शंकर जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया। इनमें आवारा, श्री 420, चोरी चोरी, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है, संगम, तीसरी कसम, दीवाना, एराउंड द वर्ल्ड, मेरा नाम जोकर, कल आज और कल आदि फ़िल्में शामिल हैं। इसके अलावा हसरत जयपुरी साहब ने फिल्मों के नाम के ऊपर कई गाने लिखे जिनमें 'गुमनाम है कोई बदनाम है कोई (गुमनाम), तेरे घर के सामने इक घर बनाऊंगा (तेरे घर के सामने), ऐन इवनिंग इन पेरिस (ऐन इवनिंग इन पेरिस), दो जासूस करें महसूस (दो जासूस), रात और दिन दीया जले (रात और दिन), दीवाना मुझको लोग कहें (दीवाना), दिल एक मंदिर है (दिल एक मंदिर) आदि। 

'जिया बेकरार है, छोड़ गए बालम, झनक झनक तोरी बाजे पायलिया, ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना, पंख होती तो उड़ आती रे, एहसान होगा तेरा मुझ पर, तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे, आओ ट्विस करें, सय्यों नारा सय्यो नारा, अजहुँ ना आये बालम, दुनिया बनाने वाले, सुन साहिबा सुन, जाने कहाँ गये वह दिन, बहारों फूल बरसाओ, ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर, तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूँ, आजा सनम मधुर चांदनी में हम तुम, इचक दाना बीचक दाना, कौन है जो सपनों में आया, रूख से जरा नकाब उठाओ मेरे हुजूर, पर्दे में रहने दो पर्दा ना उठाओ जैसे प्रसिद्ध गीतों की रचना करने वाले हसरत साहब एक हिन्दू लड़की राधा से प्यार करते थे। लेकिन वह डर के कारण कभी उनसे अपनी मुहब्बत का इज़हार नहीं कर पाये।

उन्होंने उस लड़की को देने के लिए कई चिट्ठियां भी लिखी, लेकिन दे नहीं पाए। उनके एक चिट्ठी में लिखे गीत 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज़ ना होना' को जब राजकपूर साहब ने पढ़ा तो अपनी फ़िल्म 'प्रेम-पत्र' के लिए रिकॉर्ड करवाया। हसरत जयपुरी साहब को दो बार फ़िल्म फेयर अवार्ड मिला था। एक बार 'सूरज' फ़िल्म के गीत 'बहारों फूल बरसाओ' और दूसरा 'अंदाज़' फ़िल्म के गीत 'ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना' के लिए। हसरत साहब के अधिकतर गीतों को मन्ना डे और मुकेश दा ने आवाज़ दी। अपने तीन दशक लंबे करियर में 300 फिल्मों के 2000 से ज़्यादा गीत लिखने वाले और 'चल मेरे साथ चल' 'ये कौन आ गयी दिलरुबा' 'आवाज़ देकर मुझे तुम बुलाओ' जैसे ग़ज़ल लिखने वाले हसरत जयपुरी 17 सितम्बर 1999 इस दुनिया को छोड़ कर चले गये।

महान गीतकार को उनके लिखे एक गीत की कुछ पंक्तियों के साथ खिराज़-ए-अक़ीदत..!

'वो क्या चीज थी मिलाके नजर पिला दी 
हुआ वो असर की हमने नजर झुका दी 
होंगी दो दो बात आज मिलन में

दो दिल मिल गये, दिये जल गये हजारों 
अजी तुम मिल गये, तो गुल खिल गये हजारों 
रिमझिम बरसे प्यार आज चमन में

धीरे-धीरे चल चाँद गगन में...!'
3 weeks ago

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