आख़िर सीमाब अकबराबादी का यह शेर बहादुर शाह ज़फर के नाम से मशहूर क्यूं हुआ

umra e daraz maang ke layi thi chaar din
                
                                                             
                            

हिंदुस्तान में मुग़लों के आख़िरी बादशाह थे - बहादुर शाह ज़फ़र। जिन्हें शायरी कहने का भी शौक था कि वह उर्दू अदब के नामों में भी शुमार हो गए। ज़फ़र के कलामों में हर रंग मिलता है, उनके कलाम खूब मशहूर हुए। लेकिन एक ख़ास शेर है जो उनके नाम के साथ जुड़ गया जबकि वह उनका कहा नहीं है। वह शेर कुछ यूं है कि 
 

उम्र-ए-दराज़ मांग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

 

असल में इस शेर को सीमाब अकबराबादी ने कहा है। लेकिन क्या कारण रहा कि एक शायर का कहा कलाम किसी दूसरे शायर के नाम के साथ जुड़ गया। दरअसल यह शेर ज़फ़र की ज़िंदगी के बहुत क़रीब महसूस होता है।

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5 months ago

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