दिलीप चित्रे: जिस कला ने फ़क़ीरी में भी सिर्फ़ काग़ज़ और पेंसिल की ही सस्ती माँग से साथ दिया वह कविता थी

दिलीप चित्रे की कविताएँ
                
                                                             
                            आज मराठी कवि किन्तु या यूँ कहें कि भारतीय कवि दिलीप चित्रे की जन्मतिथि है। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में दिलीप चित्रे साहब ने भारतीय काव्य परिदृश्य पर ना सिर्फ अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई बल्कि अपने विदग्धता, साहस और नवाचार से भारतीय कविता को बदला भी। खुद दिलीप कहते हैं, "मैंने चित्रकला, चित्रपट और संगीत की संगति की और उसे अपने भीतर ज़िंदा रखा।...लेकिन इन माध्यमों में काम करना ख़र्च के लिहाज़ से मेरे बूते के बाहर था, जिसे जुगाड़ पाना हर वक़्त सम्भव नहीं रहा। जिस कला ने फ़क़ीरी में भी सिर्फ़ काग़ज़ और पेंसिल की ही सस्ती माँग से साथ दिया वह कविता थी। यही मेरे अच्छे-बुरे दिनों की संगिनी रही। कविता ही मेरे लिए स्वायत्त और स्वालम्बी साधन बनी। यही मेरे आत्म शोध का आजीवन संसाधन बनी।"
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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1 week ago

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