आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Shayari: आईना दिखाते 10 चुनिंदा शेर

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे 
                                                                                                

ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे 
~ मिर्ज़ा ग़ालिब

मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ 
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में 
~ मुनीर नियाज़ी आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X