कमाल ये है कि दुनिया को कुछ पता न लगे: अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

उर्दू अदब
                
                                                             
                            कमाल ये है कि दुनिया को कुछ पता न लगे 
                                                                     
                            
हो इल्तिजा भी कुछ ऐसी कि इल्तिजा न लगे 

पुरानी बातें हैं अब उन का ज़िक्र भी छोड़ो 
अगर किसी को सुनाऊँ तो इक फ़साना लगे 

वो एक लम्हा था जिस ने किया मुझे बिस्मिल 
मैं दास्तान बताऊँ तो इक ज़माना लगे 

बसे हैं जल्वे कुछ ऐसे निगाह-ए-आशिक़ में 
जिसे भी देखे कोई तुझ से मा-सिवा न लगे 

न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुँचा 
दुआ भी काम न आए कोई दवा न लगे  आगे पढ़ें

3 months ago

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