Faiz Ahmaf Faiz Poetry: राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया 

faiz ahmed faiz
                
                                                             
                            राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया 
                                                                     
                            
दिल बहुत कुछ जला के देख लिया 

और क्या देखने को बाक़ी है 
आप से दिल लगा के देख लिया 

वो मिरे हो के भी मिरे न हुए 
उन को अपना बना के देख लिया  आगे पढ़ें

1 month ago

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