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नज़ीर बनारसी: आ तू भी आ कि आ गई छब्बीस जनवरी 

उर्दू अदब
                
                                                                                        
ऐ शांति अहिंसा की उड़ती हुई परी 
आ तू भी आ कि आ गई छब्बीस जनवरी 

सर पर बसंत घास ज़मीं पर हरी हरी 
फूलों से डाली डाली चमन की भरी भरी 
आई न तू तो सब की सुनूँगा खरी खरी 
तुझ बिन उदास है मिरी खेती हरी-भरी 
आ जल्द आ कि आ गई छब्बीस जनवरी 

घूँघट उलट रही है चमन की कली कली 
शाख़ें तो टेढ़ी-मेढ़ी हैं सूरत भली भली 
रंगीनियाँ हैं बाग़ में ख़ुशबू गली गली 
शबनम से है कली की पियाली भरी भरी 
आ तू भी आ कि आ गई छब्बीस जनवरी  आगे पढ़ें

4 months ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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