विज्ञापन

हसरत मोहानी: और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के

हसरत मोहानी: और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के
                
                                                                                 
                            और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के 
                                                                                                

आज़माया जो उन्हें ज़ब्त-ए-मोहब्बत कर के 

दिल ने छोड़ा है न छोड़े तिरे मिलने का ख़याल 
बार-हा देख लिया हम ने मलामत कर के 

देखने आए थे वो अपनी मोहब्बत का असर 
कहने को ये है कि आए हैं अयादत कर के 

पस्ती-ए-हौसला-ए-शौक़ की अब है ये सलाह 
बैठ रहिए ग़म-ए-हिज्राँ पे क़नाअत कर के 

दिल ने पाया है मोहब्बत का ये आली रुत्बा 
आप के दर्द-ए-दवाकार की ख़िदमत कर के 

रूह ने पाई है तकलीफ़-ए-जुदाई से नजात 
आप की याद को सरमाया-ए-राहत कर के 

छेड़ से अब वो ये कहते हैं कि संभलों 'हसरत' 
सब्र ओ ताब-ए-दिल-ए-बीमार को ग़ारत कर के 
1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X