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Nida Fazli Poetry: गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला 
                                                                                                

चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला 

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है 
सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला 

फिर रौशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें 
झूटों की दुनिया में सच को ताबानी दे मौला  आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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