Qismat shayari: मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी 

उर्दू अदब
                
                                                             
                            टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर 
                                                                     
                            
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए 
- सज्जाद बाक़र रिज़वी

रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को 
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी 
- जलील मानिकपूरी

तुम हमारे किसी तरह न हुए 
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 
- मोमिन ख़ाँ मोमिन आगे पढ़ें

3 months ago

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