Shakeb Jalali poetry: मरीज़-ए-ग़म के सहारो कोई तो बात करो 

उर्दू अदब
                
                                                             
                            मरीज़-ए-ग़म के सहारो कोई तो बात करो 
                                                                     
                            
उदास चाँद सितारो कोई तो बात करो 

कहाँ है डूब चुका अब तो डूबने वाला 
शिकस्ता-दिल से किनारो कोई तो बात करो 

मिरे नसीब को बर्बादियों से निस्बत है 
लुटी हुई सी बहारो कोई तो बात करो 

कहाँ गया वो तुम्हारा बुलंदियों का जुनून 
बुझे बुझे से शरारो कोई तो बात करो  आगे पढ़ें

3 months ago

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