Tamanna shayari: दिल ने तमन्ना की थी जिस की बरसों तक 

उर्दू अदब
                
                                                             
                            मिरे सारे बदन पर दूरियों की ख़ाक बिखरी है 
                                                                     
                            
तुम्हारे साथ मिल कर ख़ुद को धोना चाहता हूँ मैं 
- फ़रहत एहसास

दिल ने तमन्ना की थी जिस की बरसों तक 
ऐसे ज़ख़्म को अच्छा कर के बैठ गए 
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

एक भी ख़्वाहिश के हाथों में न मेहंदी लग सकी 
मेरे जज़्बों में न दूल्हा बन सका अब तक कोई 
- इक़बाल साजिद आगे पढ़ें

4 months ago

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