आलोक कुमार मिश्रा: जब उड़ोगे तब जानोगे कि जाने कब से हो तुम ज़िदगी के पिंजरे में

ग़ज़ल की हकीकत बयानी- समुंदर पर ही बारिश हो रही है
                
                                                             
                            जब उड़ोगे तब जानोगे 
                                                                     
                            
कि जाने कब से हो तुम
ज़िदगी के पिंजरे में।

चलोगे तब पता चलेगा
कि पैरों में पड़ी हैं 
जाने कितनी मजबूरियों की बेड़ी।

जगोगे तब समझोगे
कि अब तक जिसे समझे थे हक़ीक़त
सब सपना था या भ्रम। आगे पढ़ें

3 months ago

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