विज्ञापन

Social Media Poetry: तुमने प्रेम मांगा था, मेरे पास प्रतीक्षा थी 

सोशल मीडिया
                
                                                                                 
                            तुमने प्रेम मांगा था 
                                                                                                

मेरे पास प्रतीक्षा थी 
मैंने प्रतीक्षा की थी, वही जमा होती रही मेरे पास 
देर तक निहारता रहा पत्थर कि भगवान निकलेंगे 
देखता रहा रेगिस्तान कि अभी नदी बहेगी यहीं 
आसमान को हाथ से छू लूंगा 
ज़मीन को सिर पर उठाए चलूँगा 
मैं अपने आज में इस तरह धंसा था कि 
कल आता ही नहीं था 

मैं एक रुके हुए क्षण में न जाने कितने जन्मों से प्रतीक्षारत था 
और तुमने मुझसे कहा: जल्दी आना
मैं नहीं जानता अपने घर का पता 
अपनी देह में रहते हुए आदमी को भी नहीं जानता 
सुबह उठ कर सोचता हूँ पूर्वजन्म में क्या था 
कि इस जन्म में वह हो गया जो मैं हूँ 
मैं कैसे आ सकता था जल्दी 
जल्दी कैसा तो शब्द है 
जैसे दूर कोई तारा हो और मैं तरसती हुई आँख 
नींद का एक सुनहला टुकड़ा और मैं एक अभागी जाग आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X