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Social Media Poetry: दियों के होते हुए भी अंधेरा होता है

Social Media Poetry:दियों के होते हुए भी अंधेरा होता है
                
                                                                                 
                            दियों के होते हुए भी अंधेरा होता है
                                                                                                

मियाँ चराग़ तले भी अंधेरा होता है

तुम्हारी धूप ढली तो हमारी आँख खुली
ज़ियादा रौशनी से भी अंधेरा होता है

हमेशा घर में ही रहते हो, कुछ ख़्याल करो
तुम्हारे घर के परे भी अंधेरा होता है

अगर वो शक्ल है सूरज-सिफ़त तो उससे कहो
कि आंखे मूंदने से भी अंधेरा होता है

शबे फ़िराक़ की तारीकियों से वाक़िफ़ हो ? 
बग़ैर शम्अ बुझे भी अंधेरा होता है

साभार चराग़ शर्मा की फेसबुक वॉल से
1 month ago

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