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Social Media Poetry: कुछ तो चाँद सितारों की आपस में बातें होती हैं

Social Media Poetry:कुछ तो चाँद सितारों की आपस में बातें होती हैं
                
                                                                                 
                            कुछ तो चाँद सितारों की आपस में बातें होती हैं
                                                                                                

यूँ ही थोड़ी दिन छोटे और लम्बी रातें होती हैं

तुम क्या जानो हिज्र की वहशत, आओ तुमको दिखलाएँ
दीवारों से दरवाज़ों से कैसे बातें होती हैं

मुश्किल से यकजा होते हैं उसके और मेरे रस्ते
रोज़ कहाँ हम ऐसे लोगों की मुलाक़ातें होती हैं

दिल से उठती हूक सुनी है हम ने प्यासी धरती की
कच्चे आँगन में मौसम की जब बरसातें होती हैं

आसूँ, आहें, ख़्वाब और ख़्वाहिश, वहशत, हिजरत, बेचैनी
इश्क़ हमें मालूम नहीं था ये सौगातें होती हैं

साभार ज्योती आज़ाद खतरी की फेसबुक वॉल से
1 month ago

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