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Hindi Kavita: स्वाति शर्मा की 3 कविताएं

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सिनेमाघर  


सिनेमाघरों के बाहर  
होनी चाहिए
बौगनविलिआ के सभी रंगों की बेलें  
सफ़ेद, ग़ुलाबी, संतरी  
मधुमती से सनी दीवारें  
और होने चाहियें  
मक़बरों के बाहर लगने वाले  
बूढ़े शहतूत के दरख़्त  
थियेटरों के बाहर  
खच्च- छप्प करते गिरते  
सेमल के फूलों से  
ज़मीन रंगी होनी चाहिए  
और पार्किंग के बाहर 
हरे चने छीलता बेचता  
आदमी बैठा होना चाहिए  
बॉक्स ऑफिस के बाहर  
प्रेमी जोड़ों की लाइन  
अलहदा होनी चाहिए  
लॉबी की ज़मीन पर  
गुदे होने चाहिए  
नक्षत्रों के जटिल जाल  
फ़िल्म शुरू होने से पहले  
खड़ा कर हर एक हाथ में  
थमा देने चाहिए  
कॉम्प्लिमेंटरी पॉपकॉर्न के डब्बे  
और स्क्रीन पर शहर के  
सभी पुराने नीम के पेड़ों की  
तसवीरें चलनी चाहियें  
सिनेमाघरों के बाहर  
मिलने चाहिए मुफ्त शब्दकोष  
होनी चाहियें सभी रोक देने की कवायदें  
सारे थाम लेने के सामान  
पेट और मन भरने के सभी इंतज़ाम 
थियेटरों और मक़बरों के बाहर  
होनी चाहिए एक अदद  
बैठ जाने की छाँव 
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धुँधलका

2 months ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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