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UNICEF की सलाह: बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत आवश्यक, जानिए किस उम्र में कौन सी वैक्सीन जरूरी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 18 Aug 2022 02:40 PM IST
बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत आवश्यक
बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत आवश्यक - फोटो : UNICEF
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बच्चों के बेहतर सेहत के लिए उनका समय-समय पर टीकाकरण कराते रहना बहुत जरूरी है, यह उन्हें गंभीर संक्रमण और कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। टीकाकरण का ही प्रभाव है कि दो-तीन दशक पहले तक जिन बीमारियों के कारण बच्चों में सबसे अधिक मृत्यु के मामले देखे जाते रहे थे,वह अब लगभग न की स्थिति में हैं।



हालांकि पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार से कई संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा हुआ देखा गया है, इनसे बच्चों को बचाने के लिए टीकाकरण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे  निश्चित उम्र में कुछ बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं, ऐसे में टीके प्रभावी तभी होते हैं जब उन्हें सही उम्र सुझाई गई मात्रा में दिया जाए। 


बच्चों के बेहतर सेहत को सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ ने टीकाकरण की आवश्यकताओं पर जोर दिया है। जिन बच्चों को समय पर टीका नहीं लग पाता है उनमें कई प्रकार की बीमारियों के विकसित होने का खतरा रहता है, उदाहरण के लिए पोलियो जैसी बीमारियां पूरे जीवन की गुणवत्ता को खराब कर सकती हैं। यूनिसेफ कहता है सभी माता-पिता को बच्चों में टीकाकरण की आवश्यकताओं और इससे होने वाले फायदों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए, जिससे हम बच्चों को स्वस्थ भविष्य का उपहार दे सकें। आइए जानते हैं कि बच्चों को कब-कब किन टीकों को लगवाना बहुत आवश्यक है, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं की जानी चाहिए।


जन्म के समय टीकाकरण

विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों को जन्म से लेकर 16 साल तक नियमित अंतराल पर टीकाकरण की आवश्यकता होती है। जन्म के समय बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बी.सी.जी), पोलियो की पहली खुराक, हेपेटाइटिस बी के टीके लगाए जाते हैं। पोलियो की ओरल वैक्सीन बच्चों को पांच साल की उम्र तक दी जाती है। यह उनमें लकवे की समस्या को दूर रखने में मदद करती है। भारत फिलहाल पोलियो मुक्त देशों की सूची में है। कई बीमारियों पर टीकाकरण के ही चलते भारत ने बेहतर ढंग से नियंत्रण भी पा लिया है।

जन्म के छह महीने से एक साल का टीकाकरण

जन्म के छठवें माह में पोलियो की दूसरी खुराक दी जाती है। यह टीका पोलियो वायरस से बचाता है जो अत्यधिक संक्रामक रोग है और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर लकवा का कारण बनता है। यह वायरस मुख्य रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।


छठे महीने में पेंटावैलेंट टीका भी दिया जाता है, यह टीका पांच घातक रोगों गलघोंटू, परटूसिस (काली खांसी), टेटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (हिब) से सुरक्षा देता है। इसके साथ रोटावायरस और न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन भी दी जाती है।

दसवें महीने पेंटावैलेंट का दूसरा टीका, पोलियो, रोटावायरस का टीका दिया जाता है। समयवर ये टीके रिपीट किए जाते हैं।

नौंवे से 12वें महीने में खसरा और रूबेला, जापानी इंसेफेालइटिस और फिर 16-24वें महीने में इन टीको को दोबारा दिया जाता है।

पांच साल के बाद का टीकाकरण

बच्चों को पांच से छह साल के दौरान डिप्थीरिया पर्टुसिस और टेटनस का बूस्टर डोज, 10वें साल में टेटनस और एडल्ट डिप्थीरिया और 16वें साल में एक बार फिर से एडल्ट डिप्थीरिया की खुराक दी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं ये टीके सभी बच्चों को दिए जाने बहुत आवश्यक हैं, सभी माता-पिता इनकी खुराक समय पर मिले, यह जरूर सुनिश्चित करें। बच्चों को कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के जोखिम से बचाने और उनमें मृत्युदर को कम करने के लिए टीकाकरण आवश्यक है। देश के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ज्यादातर टीके मुफ्त उपलब्ध होते हैं।   

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नोट: यह लेख यूनिसेफ द्वारा साझा की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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