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यूपी चुनाव : सांसदों सहित जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को भी चुनाव मैदान में उतार सकती है भाजपा, एक-एक सीट पर मंथन

सचिन मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 08 Dec 2021 04:52 PM IST

सार

यूपी चुनाव 2022 में भाजपा एक-एक सीट पर मंथन कर रही है। इस रणनीति के तहत पार्टी भाजपा सांसदों, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को भी चुनाव में उतार सकती है।
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भाजपा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

यूपी विधानसभा चुनाव-2022 में मिशन 300 प्लस के साथ चुनाव लड़ रही भाजपा सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को चुनाव मैदान में उतार सकती है। एक-एक विधानसभा सीट पर जीत के लिए गहन मंथन में जुटे भाजपा के रणनीतिकार निगम, आयोग और बोर्डों के प्रभावशाली अध्यक्षों को भी चुनाव लड़ाने पर मंथन कर रहे है।



विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने 384 सीटों पर चुनाव लड़कर 312 सीटों पर जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव-2022 में भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदेश में 300 से अधिक सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। यूपी चुनाव के परिणाम 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को पूरी तरह प्रभावित करेंगे। यही वजह है कि भाजपा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक-एक सीट पर प्रत्याशी चयन में गहन मंथन कर रही है। भाजपा के रणनीतिकार किसी भी सीट पर जोखिम उठाने की जगह सटीक रणनीति से जिताऊ उम्मीदवार को टिकट देना चाहते है।


सांसद को विधायक का चुनाव जीतने पर बनाया जा सकता है मंत्री
भाजपा के एक उच्च पदस्थ पदाधिकारी बताते हैं कि जहां कहीं जातीय समीकरण बनाने और वर्तमान विधायक से कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए पार्टी के सांसद को भी चुनाव लड़ा सकती है। खासतौर पर ऐसे सांसद जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल और पार्टी की राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली है उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाकर सरकार बनने पर मंत्री पद दिया जा सकता है।

उनका कहना है कि प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों का चयन हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। युवा जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख सरकार व जनता की अपेक्षा के अनुरूप काम करने के साथ क्षेत्र में कुछ नवाचार कर अपनी अलग छवि बनाने का प्रयास कर रहे है। भाजपा विधानसभा चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के काम और छवि का फायदा उठाने के लिए उन्हें उम्मीदवार बनाने का दांव भी लगा सकती है।

पार्टी ने ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य के साथ पिछड़ी व दलित जातियों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को आयोगों, निगम और बोर्डों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नामित कराया था। प्रदेश के विभिन्न आयोग, बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के जातीय वोट बैंक को साधने और उनके प्रभुत्व का उपयोग करने के लिए पार्टी उन्हें भी टिकट दे सकती है।

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