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जैव ऊर्जा इकाइयों का हब बनेगा यूपी : निजी क्षेत्र में जैव ऊर्जा इकाइयों की स्थापना, निर्माण व संचालन पर जोर

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 07 Oct 2022 12:16 PM IST
सार

जैव ऊर्जा इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने और नीति के क्रियान्वयन के लिए यूपीनेडा नोडल एजेंसी होगी। नोडल एजेंसी निवेशकों व विकासकर्ताओं का पंजीकरण, उनकी जिज्ञासाओं व समस्याओं का समाधान और विभिन्न विभागों में इन इकाइयों के लंबित आवेदन पत्रों के त्वरित निस्तारण में सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा इकाइयों को हब बनेगा। इसके लिए सरकार ने हाल ही जैव ऊर्जा नीति 2022 को मंजूरी दी है। इसके जरिए सरकार निजी निवेशकों व विकासकर्ताओं को आकर्षित कर उनके माध्यम से जैव ऊर्जा इकाइयों की स्थापना, निर्माण व संचालन को प्रोत्साहित करेगी। नई नीति पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत पंजीकृत और लगाई जाने वाली इकाइयों को अनुमन्य लाभ व सुविधाएं परियोजना पूरी होने तक प्राप्त होती रहेंगी। वर्ष 2018 की नीति के तहत जिन इकाइयों को स्वीकृति पत्र जारी हो चुका है, उन्हें नियत शर्तों के अधीन लाभ प्राप्त होते रहेंगे।



नई नीति के अंतर्गत स्थापित जैव ऊर्जा इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन आरंभ होने की तिथि से 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क में शत प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यही नहीं, जैव ऊर्जा इकाइयों, संयंत्रों की स्थापना या फीड स्टॉक संग्रहण व भंडारण के लिए निजी काश्तकारों से भूमि खरीद या लीज के माध्यम से लिए जाने पर किरायानामा, लीज व रजिस्ट्री पर देय स्टांप ड्यूटी की शत प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। इसके अलावा जैव ऊर्जा इकाइयों को प्रदेश के विकास प्राधिकरणों द्वारा लिए जाने वाले विकास शुल्क से भी शत प्रतिशत छूट दी जाएगी।


राज्य सरकार देगी सब्सिडी
नई जैव ऊर्जा नीति के तहत केंद्र सरकार की योजना के तहत संयंत्रों पर दी जा रही अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा 30 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 20 लाख रुपये) प्रदेश सरकार द्वारा बेलर, रेकर और ट्रॉली उपकरणों पर यूपीनेडा के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही जैव ऊर्जा इकाइयों को उत्पादन क्षमता पर अनुदान दिया जाएगा। कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन पर 75 लाख रुपये प्रति टन की दर से अधिकतम 20 करोड़ तक, बायोकोल उत्पादन पर 75 हजार रुपये प्रति टन की दर से अधिकतम 20 करोड़ रुपये, बायो डीजल के उत्पादन पर 3 लाख रुपये प्रति किलोलीटर की दर से अधिकतम 20 करोड़ रुपये दिया जाएगा। इस सब्सिडी का उपयोग इकाई द्वारा प्लांट एवं मशीनरी, बुनियादी ढांचा, निर्माण, विद्युत आपूर्ति व ट्रांसमिशन तंत्र से संबंधित कार्यों के लिए किया जा सके गा। इसमें प्रशासनिक भवन व भूमि की लागत शामिल नहीं है।

विशेषज्ञों की टीम करेगी निरीक्षण
जैव ऊर्जा इकाई को सब्सिडी देने की कुछ शर्तों भी होंगी। इनके तहत परियोजना संबंधी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का परीक्षण विषय विशेषज्ञों की टीम से कराया जाएगा। पूंजीगत सब्सिडी की धनराशि संबंधित इकाई के पूर्ण क्षमता पर उत्पादन शुरू होने के बाद बैंक लोन अकाउंट में जारी की जाएगी। इसके अलावा अगर इकाई के निवेशक द्वारा कोई भी बैंक लोन नहीं लिया जाता है तो पूंजीगत सब्सिडी की धनराशि इकाई के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी। सब्सिडी की मंजूरी व परियोजना की पूर्णता की तिथि में समय विस्तार को अनुमन्य किए जाने के लिए अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग सक्षम अधिकारी होंगे। अगर किसी उद्यमी द्वारा बायोप्लांट में 50 करोड़ या उससे अधिक का निवेश किया जाता है तो उसे इकाई से अधिकतम 5 किलोमीटर तक एप्रोच रोड की सुविधा मुख्य मार्ग तक दी जाएगी।

यूपीनेडा होगी नोडल एजेंसी
जैव ऊर्जा इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने और नीति के क्रियान्वयन के लिए यूपीनेडा नोडल एजेंसी होगी। नोडल एजेंसी निवेशकों व विकासकर्ताओं का पंजीकरण, उनकी जिज्ञासाओं व समस्याओं का समाधान और विभिन्न विभागों में इन इकाइयों के लंबित आवेदन पत्रों के त्वरित निस्तारण में सहयोग करेगी।

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