यूपी : महंगी बिजली खरीदने के बाद भी संकट से राहत नहीं, अभी भी 5000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 17 Oct 2021 10:03 AM IST

सार

कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट से राहत देने के लिए पॉवर कॉर्पोरेशन महंगी बिजली खरीद तो रहा है, पर हालात सामान्य होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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विस्तार

कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट से राहत देने के लिए पॉवर कॉर्पोरेशन महंगी बिजली खरीद तो रहा है, पर हालात सामान्य होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। कोयले की कमी से तापीय इकाइयों में उत्पादन बंद या कम होने का सिलसिला जारी है। शनिवार शाम को प्रदेश की 5 हजार मेगावाट से ज्यादा क्षमता की इकाइयां या तो बंद हैं या उनके  उत्पादन में कमी की गई है।
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बिजली आपूर्ति के लिए प्रदेश में एनर्जी एक्सचेंज से 17-18 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है। दशहरे पर तो जैसे-तैसे अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करके आपूर्ति सामान्य रखी गई, लेकिन शनिवार से फिर ग्रामीण क्षेत्रों व तहसील मुख्यालयों पर कटौती की जा रही है। फिलहाल स्थिति जल्द सामान्य होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।


शनिवार को 5005 मेगावाट की कमी
सरकारी बिजलीघर    1305 मेगावाट
निजी बिजलीघर    2700 मेगावाट
एनटीपीसी    1000 मेगावाट

मांग और उपलब्धता में भारी अंतर
प्रदेश में पीक ऑवर्स में बिजली की मांग 20 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंच रही है, जबकि कुल उपलब्धता 17000-18000 मेगावाट है। दशहरे पर बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखने के लिए एनर्जी एक्सचेंज से 1400-2500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ी।

कोयले की कमी से बिजली व्यवस्था अस्त-व्यस्त

कोयले की कमी ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था अस्त-व्यस्त कर दी है। एक तरफ जहां बिजलीघरों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है वहीं महंगी बिजली खरीदने से पावर कार्पोरेशन की माली हालत खस्ता होती जा रही है। त्योहारी सीजन में बिजली आपूर्ति पटरी पर रखना पावर कॉर्पोरेशन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 
 
शनिवार को राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अनपरा ए परियोजना में 130 मेगावाट, अनपरा बी परियोजना में 200 मेगावाट अनपरा डी परियोजना में 190 मेगावाट, हरदुआगंज में 200 मेगावाट, पारीछा में 90 मेगावाट तथा ओबरा में 180 मेगावाट उत्पादन घटाना पड़ा है जबकि हरदुआगंज की 105 मेगावाट प पारीछा की 210 मेगावाट की एक-एक इकाई बंद करनी पड़ी है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों के मुताबिक अनपरा में डेढ़ दिन से भी कम, ओबरा में दो दिन तथा पारीछा व हरदुआगंज में आधे-आधे दिन के  कोयले का स्टॉक रह गया है।

स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अधिकारियों का कहना है कि बिजली उत्पादन में कमी की वजह से ग्रिड पर दबाव बना हुआ है। अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद ग्रिड को सुरक्षित रखने के लिए गाहे-बगाहे ग्रामीण क्षेत्रों व तहसील मुख्यालयों पर कटौती करनी पड़ रही है। कुछ शहरों में भी अघोषित कटौती करनी पड़ रही है। फिलहाल अभी कुछ दिनों तक संकट बरकरार रहने के आसार हैं।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे का कहना है कि कोयले की अनुपलब्धता के कारण व्याप्त राष्ट्रव्यापी बिजली संकट के दौर में निजी बिजली उत्पादक कंपनियों द्वारा एक ओर आयातित कोयले से चलने वाले अपने बिजलीघरों को पीपीए का खुला उल्लंघन कर बंद कर देना और दूसरी ओर एनर्जी एक्सचेंज के जरिये खुले बाजार में 15 से 20 रुपये यूनिट तक बिजली बेचना काला बाजारी की श्रेणी में आता है।

केंद्र सरकार को करार का उल्लंघन कर आयातित कोल से चलने वाले बिजलीघरों को बंद करने वाली कंपनियों पर कर्रवाई करनी चाहिए। साथ ही एनर्जी एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम दर पांच रुपये प्रति यूनिट निर्धारित करना चाहिए। दुबे ने कहा कि आयातित कोयले से बिजली उत्पादन करने वाले निजी क्षेत्र के बिजलीघरों मे 30 प्रतिशत उत्पादन घटा दिया है। मूंदड़ा में टाटा पावर ने अपना 4000 मेगावाट और मूंदड़ा में ही अडानी ने अपना 4000 मेगावाट का बिजलीघर पूरी तरह बंद रखा है। केंद्रीय विद्युत मंत्री और विद्युत सचिव केवल बयानबाजी कर रहे हैं।
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