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MP News: धन वर्षा के अंधविश्वास में बाघ की बलि! खाल, खोपड़ी और पंजों के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला,छिंदवाड़ा Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Tue, 09 Jun 2026 10:09 AM IST
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सार

छिंदवाड़ा जिले में वन विभाग ने बाघ के अंगों की तस्करी और अवैध शिकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुखबिर की सूचना पर जामुनिया गांव में की गई छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से बाघ की खाल, खोपड़ी और नाखून सहित चार पंजे बरामद किए गए।

chhindwara tiger poaching case tiger skin skull claws seized wildlife smuggling forest department action
नोटों की बारिश के लालच में बाघ का शिकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बाघ के अंगों की तस्करी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बाघ की खाल, खोपड़ी और नाखून सहित चार पंजे बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने तंत्र-मंत्र और धन प्राप्ति के अंधविश्वास के चलते बाघ का शिकार किया था। वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सरगना और अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गया है।

मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

उपवन मंडल अधिकारी अनादि बुधौलिया ने बताया कि वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जामुनिया गांव में कुछ लोग बाघ के अंगों को बेचने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग ने एक विशेष टीम का गठन कर छापामार कार्रवाई की।

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वन अमले ने जामुनिया गांव में घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से प्रतिबंधित वन्यजीव अंग बरामद किए गए, जिनमें एक बाघ की खाल, एक बाघ की खोपड़ी और नाखून सहित चार बाघ के पंजे शामिल हैं।

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अंधविश्वास के कारण किया गया बाघ का शिकार

वन अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर बाघ सहित अन्य वन्यजीवों का शिकार किए जाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कई लोग यह मान्यता रखते हैं कि बाघ और अन्य वन्यजीवों के अंगों का विशेष पूजा-पाठ में उपयोग करने से धन वर्षा होती है और आर्थिक लाभ मिलता है। प्रारंभिक पूछताछ में भी इसी तरह के अंधविश्वास का पहलू सामने आया है।

चार आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना की तलाश जारी

वन विभाग ने आरोपियों के कब्जे से बरामद सभी वन्यजीव अंगों को नियमानुसार अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
वन विभाग की टीम आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े मुख्य सरगनाओं और अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।

नरसिंहपुर के जंगल में किया था बाघ का शिकार

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि बाघ का शिकार नरसिंहपुर जिले के करेली क्षेत्र के पास स्थित जंगल में किया गया था। शिकार के बाद उन्होंने बाघ के अंग अलग किए और जंगल के रास्तों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जामुनिया गांव तक पहुंचाया।
वन अधिकारियों के अनुसार हर्रई क्षेत्र के बाद नरसिंहपुर जिले की सीमा शुरू हो जाती है। जंगल के भीतर ऐसे कई मार्ग मौजूद हैं, जो दोनों जिलों को आपस में जोड़ते हैं और तस्कर इन्हीं रास्तों का उपयोग करते हैं।

वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चल रहा है विशेष अभियान

उपवन मंडल अधिकारी अनादि बुधौलिया ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार और वन्यजीव अंगों की तस्करी के खिलाफ विभाग लगातार सघन अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत वन विभाग को यह महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
उन्होंने बताया कि वन संरक्षक कमल अरोरा के निर्देशन में विशेष कार्रवाई दल का गठन किया गया था। इसके बाद उपवन मंडल अधिकारी सुश्री कीर्ति बाला गुप्ता और सावरी परिक्षेत्र अधिकारी के संयुक्त नेतृत्व में सावरी परिक्षेत्र के स्टाफ ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया।

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घेराबंदी कर दबोचे गए तस्कर

वन विभाग की टीम ने जामुनिया गांव में पूरी रणनीति के साथ घेराबंदी कर दबिश दी। अधिकारियों के मुताबिक टीम की मुस्तैदी और सटीक योजना के कारण मौके पर मौजूद तस्करों को भागने का कोई अवसर नहीं मिला और सभी आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया।
वन विभाग का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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