Shahdol News: शहडोल में किन्नर महामंडलेश्वर और संतों का महासमागम, सनातन धर्म में 6 किन्नरों की घर वापसी
शहडोल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय किन्नर महासमागम में देशभर के किन्नर महामंडलेश्वर और संत शामिल हुए। कार्यक्रम में पट्टाभिषेक, शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठान हुए। छह किन्नरों की सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई। संतों ने समाजसेवा, सामाजिक समरसता और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया।
शहडोल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय किन्नर महासमागम में देशभर के किन्नर महामंडलेश्वर और संत शामिल हुए। कार्यक्रम में पट्टाभिषेक, शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठान हुए। छह किन्नरों की सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई। संतों ने समाजसेवा, सामाजिक समरसता और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया।
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सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ शहडोल में दो दिवसीय राष्ट्रीय किन्नर महासमागम का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में देशभर से किन्नर महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और संत समाज के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम जगद्गुरु काजल ठाकुर मां (भोपाल) के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जबकि आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी शहडोल की सोनाली पटेल और सिवनी की सिवानी पटेल ने संभाली।
पहले दिन जुड़ाव, दूसरे दिन पट्टाभिषेक
महासमागम के पहले दिन विभिन्न राज्यों से पहुंचे किन्नर समाज और संतों का परिचय एवं जुड़ाव कार्यक्रम आयोजित हुआ। दूसरे दिन सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पट्टाभिषेक कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें कई संतों और किन्नर प्रतिनिधियों को धार्मिक पदवियां प्रदान की गईं।
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सनातन धर्म में घर वापसी
कार्यक्रम के दौरान 6 किन्नरों की विधि-विधान और शुद्धिकरण के साथ सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई। संत समाज ने इसे सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता का महत्वपूर्ण कदम बताया। शहर में गाजे-बाजे और पारंपरिक उत्साह के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
समाजसेवा ही हमारा धर्म
प्रेस वार्ता में जगद्गुरु काजल ठाकुर मां और अन्य संतों ने कहा कि उनका किसी धर्म से विरोध नहीं है और हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किन्नर समाज का उद्देश्य राजनीति या धन-संपत्ति नहीं, बल्कि धर्म और समाज सेवा है। संतों ने यह भी कहा कि डराकर या दबाव बनाकर अवैध वसूली करने वाले लोग वास्तविक किन्नर समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इस महासमागम में भोपाल, उज्जैन, इंदौर, नागपुर, जबलपुर, अमरावती, सागर और इटारसी सहित कई शहरों से संत और किन्नर नायक शामिल हुए।

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