Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Shivraj ji, is it possible for you to implement punjab model in MP?

शिवराज जी, क्या मध्यप्रदेश में भी लागू हो पाएगा पंजाब मॉडल? 

Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Wed, 25 May 2022 09:41 PM IST
सार

पंजाब में मुख्यमंत्री ने अपने भ्रष्ट मंत्री को हटाने में देर नहीं की। मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं, पर कई मंत्रियों के लिए भ्रष्टाचार ही 'सिस्टम' बन गया है।  

भगवंत मान और शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)
भगवंत मान और शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

एक अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए मैं कल महिदपुर में था। शवयात्रा से लेकर अंतिम संस्कार तक करीब डेढ़ घंटे में 50 से अधिक लोगों से संवाद हुआ। इनमें व्यापारी, किसान, आम नागरिकों के साथ ही समाज के प्रतिष्ठित लोग भी थे। बात महिदपुर के विधायक बहादुरसिंह चौहान से शुरू हुई और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर आकर खत्म हुई। लब्बोलुआब यह निकला कि विधायकों और मंत्रियों का भ्रष्टाचार शिवराज को ले बैठेगा। शाम को जब इंदौर पहुंचा, तब तक यह खबर आ चुकी थी कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. विजय सिंगला को भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया और और एंटी करप्शन ब्यूरो से उन्हें गिरफ्तार भी करवा दिया।  


शिवराज जी, मध्य प्रदेश में मंत्रियों और विधायकों के भ्रष्टाचार के किस्से अब लोगों की जुबां पर आ गए हैं। आपकी पार्टी के कार्यकर्ता ही कहने लगे हैं कि बिना पैसे के कोई काम ही नहीं करता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बेहद नजदीकी माने जाने वाले मालवा क्षेत्र के दो मंत्रियों के भ्रष्टाचार के किस्सों को तो कार्यकर्ता ही गिनाने लगे। ये दोनों मंत्री 'सिस्टम' से ही काम करते हैं। स्थिति यह है कि संघ और विधायकों की अनुशंसा के बावजूद कई मामलों में काम तभी हुआ, जब इन मंत्रियों के 'सिस्टम' को फॉलो किया गया। मंत्रियों के बंगलों से सीधे फोन कर लोगों को बुलाया जाता है और 'सिस्टम' के बाद ही आदेश मिल पाता है। हाथोंहाथ यह भी कहा जाता है कि रिकमंड कहीं से भी करवाओ, चलना `सिस्टम' से ही होगा। 


मुख्यमंत्री जी, आप जगह-जगह सभाओं में यह कहकर दहाड़ते हैं कि भ्रष्टाचार करने वाले को उल्टा लटका दूंगा, जमीन में गाड़ दूंगा और प्रदेश में रहने लायक नहीं छोडूंगा। दिल पर हाथ रखकर कहिए, क्या आपके इतने तीखे तेवर के बावजूद मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार रुक पाया? जब कोई सरकारी कारिंदा भ्रष्टाचार करता है, तब आपके मातहत उसकी पूरी कुंडली खंगाल लेते हैं। बावजूद इसके सरकारी अफसरों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पाया है। काम के नाम पर सरकारी महकमों में जो चोथ वसूली हो रही है उसकी दरें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। लोग कहने लगे हैं कि जो काम पहले एक हजार रुपये में हो जाता था, वह अब दो या तीन गुनी राशि देकर करवाना पड़ रहा है। 

मंत्रियों और विधायकों का यह भ्रष्टाचार आपको ले बैठेगा, मुख्यमंत्री जी। सालों पहले जब भाजपा के कद्दावर नेता कृष्णमुरारी मोघे, नए-नवेले अरुण यादव के खिलाफ खरगोन से लोकसभा उपचुनाव लड़ रहे थे, तब कई गांवों की खाक छानने के बाद मैंने एक प्रमुख अखबार के प्रथम पृष्ठ पर खबर लिखी थी कि विधायकों का भ्रष्टाचार मोघे को ले डूबेगा। हुआ भी यही। अब तो ऐसा लगने लगा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों और विधायकों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है। पार्टी के लोग कहने लगे हैं कि आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे ये नेता मौका आने पर आपको आंखें दिखाने में भी पीछे नहीं रहते हैं। कार्यकर्ता कहने लगे हैं कि आखिर हम काम किसके लिए करें? उस मंत्री के लिए, जो पैसा लिए बिना कोई काम नहीं करता या फिर उस विधायक के लिए जिसने अपने विधानसभा क्षेत्र को अपनी रियासत मानकर हर सरकारी महकमे से बंदी तय कर ली है? हर ठेकेदार से उसे कमीशन चाहिए। ज्यादातर विधायक तो अब ठेकों में पार्टनर हो गए हैं। संगठन में जिन लोगों को जिम्मेदारी है वे अब 'कोआर्डिनेशन' में लग गए हैं और इसकी अच्छी-खासी फीस वसूल रहे हैं। 

मंत्रियों और विधायकों के भ्रष्टाचार के किस्से आम लोगों की जुबां पर आना इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार की अति हो गई है। एक वरिष्ठ मंत्री की स्थिति यह है कि वे आवेदन पर ही कोड डाल देते हैं और बाद में उनके ओएसडी संबंधित व्यक्ति को बुलाकर हिसाब-किताब कर लेते हैं। निमाड़ से वास्ता रखने वाले एक मंत्री हर महीने अपने एक दलाल को विभाग के अफसरों के पास यह कहकर भेज देते हैं कि मुझे पार्टी फंड में पैसा देना पड़ता है। मालवा के एक वरिष्ठ मंत्री तो एक तस्कर की मदद के लिए उसे लेकर आईजी के पास पहुंच गए थे। जब उक्त मंत्री के मुताबिक तस्कर को राहत नहीं मिली तो एक ईमानदार एसपी को ताबड़तोड़ हटा दिया गया। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद मंत्री बने एक नेता के चार दलाल राजधानी में दावे के साथ कहते हैं कि किसी भी महकमे का कोई भी काम हो हमें बताइए, लक्ष्मी की कृपा से सब हो जाएगा। महाकौशल के स्वतंत्र प्रभार वाले एक मंत्री ने तो भ्रष्टाचार की इंतहा कर दी। भ्रष्टाचार के ऐसे किस्सों की फेहरिस्त बहुत लंबी है और ऐसा भी नहीं है कि आपको इसकी जानकारी न हो। 

शिवराज जी, क्या कारण है कि आप भ्रष्ट मंत्रियों और कमीशनखोर विधायकों पर नकेल नहीं कस पा रहे हैं। वे मंत्री और विधायक जो इस बिगड़ बाड़े में ईमानदारी से काम कर रहे हैं, वह भी आपसे इसलिए नाराज हैं कि इस गंदगी के छींटे उन पर भी पड़ रहे हैं। अभी भी मौका है, संभल जाइए और जो तेवर भगवंत मान ने पंजाब में अपने भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ अख्तियार किए, वैसा ही कुछ कर डालिए। अन्यथा यह भ्रष्टाचार आपको ले बैठेगा! 

(लेखक इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं।) 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें [email protected] पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00