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Phoolan Devi: 22 लोगों की हत्या करने वाली फूलन कैसे बनीं दलितों की मसीहा, मशहूर है 'बैंडिट क्वीन' की कहानी

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: पलक शुक्ला Updated Wed, 10 Aug 2022 09:31 AM IST
फूलन देवी
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जिंदगी की गाड़ी कब किस मोड़ पर हमें कहां लाकर खड़ा कर दे हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। ऐसा ही कुछ जिंदगी ने फूलन देवी उर्फ दस्यु सुंदरी के साथ किया था। दस्यु सुंदरी के नाम से मशहूर फूलन देवी किसी जमाने में डर का दूसरा नाम हुआ करती थीं। कई बार गैंगरेप, अत्याचार और फिर डाकू से सांसद बनी फूलन की जिंदगी का सफर किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है। फूलन देवी की आज यानी 10 अगस्त को 59वीं बर्थ एनिवर्सरी है। वह अपने जीवन में हुए एक कांड के कारण पूरे देशभर में मशहूर हो गई थीं और इतना ही नहीं वह अपनी मौत के 21 साल बाद तक भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कहीं न कहीं सक्रिय हैं। फूलन देवी के जीवन पर बॉलीवुड में भी एक फिल्म बनी, जिसने लोगों के दिलों दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी थी।          
फूलन देवी
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30 साल बड़े आदमी से हुई शादी
फूलन देवी का जन्म 1963 में यूपी के जालौन जिले के घूरा के एक छोटे-से पुरवा गांव में हुआ था। मल्लाह परिवार में जन्मी फूलन का जीवन बचपन से ही बहुत कठिनाइयों भरा रहा था। गरीबी के साए में बीते बचपन के बावजूद फूलन बहुत दबंग थीं। इतना ही नहीं वह लड़की और पिछड़ी जाति का दंश भी झेल चुकी थीं। अपने गुस्सैल स्वभाव के चलते एक दिन फूलन ने 10 साल की उम्र में जमीन हड़पने वाले अपने चाचा के बेटे के सिर में ईंट मार दी थी। इसी हरकत की सजा के तौर पर 11 साल की उम्र में फूलन की शादी उनसे 30 साल बड़े आदमी से कर दी गई थी। शादी के बाद पति ने उनके रेप किया, धीरे-धीरे फूलन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें मायके आना पड़ गया।  कुछ दिन बाद उसके भाई ने उसे वापस ससुराल भेज दिया। ससुराल पहुंचने पर फूलन को पता चला कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। पति और उसकी नई पत्नी ने फूलन को बेइज्जत किया, जिसके बाद उन्हें घर छोड़कर आना पड़ा।   
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फूलन देवी
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जब पीड़ित हुई फूलन
ससुराल और मायका दोनों को छोड़ने के बाद फूलन चंबल के डाकुओं के गैंग में शामिल हो गई थीं। लेकिन कुछ समय बाद ही ठाकुरों के गैंग ने 18 साल की उम्र में फूलन को किडनैप कर बेहमई गांव में तीन हफ्ते तक गैंगरेप किया। वह किसी से उन ठाकुरों के चंगुल से बचकर भाग निकली और इसके बाद 1981 में फूलन देवी ने अपने साथ हुई ज्यादती का बदला लेते हुए  22 ठाकुरों को लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था। इस घटना के बाद ही फूलन देवी की चर्चा चारों ओर होने लगी और उनका नाम 'बैंडिट क्वीन' पड़ गया था। इसके दो साल बाद 1983 में फूलन देवी ने पुलिस के सामने सरेंडर किया, उसके बाद उन पर  22 हत्या, 30 डकैती और 18 किडनैपिंग के मामलों में 11 साल की कैद हुई। 11 साल सजा काटने के बाद उन पर लगे सारे केस वापस ले लिए गए थे। जेल से बाहर आने के बाद फूलन ने उम्मेद सिंह से शादी रचाई और समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ते हुए जीत गईं। फूलन दलितों की मसीहा के तौर पर पहचानी गईं। 25 जुलाई 2001 को तीन नकाबपोशों ने फूलनदेवी की उनके दिल्ली के घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी।
बैंडिट क्वीन का एक सीन
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जब फिल्मी पर्दे पर आई 'बैंडिट क्वीन'
पूरे देशभर में प्रसिद्ध होने वाली इस महिला के जीवन को बॉलीवुड के नामी निर्देशक शेखर कपूर ने पर्दे पर लाने का फैसला किया था। लेखिका माला सेन ने फूलन देवी की जिंदगी पर 'बैंडिट क्वीन: द ट्रू स्टोरी ऑफ फूलन देवी' किताब लिखी थी, जिस पर साल 1994 में शेखर कपूर ने फिल्म 'बैंडिट क्वीन' बनाई। इस फिल्म में बड़े पर्दे पर अभिनेत्री सीमा बिस्वास ने फूलन देवी का किरदार निभाया था। उस साल इस फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था। साथ ही फिल्मफेयर का बेस्ट फिल्म क्रिटिक्स अवॉर्ड और बेस्ट डायरेक्शन का भी अवॉर्ड मिला था। इसके साथ ही सीमा बिश्वास को भी नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उस वक्त यह फिल्म काफी विवादों में भी घिर गई थीं। इतना ही नहीं फिल्म में सीमा बिस्वास द्वारा दिए गए रेप सीन पर को लेकर खूब विवाद खड़ा हुआ था। इस सीन पर सेंसर बोर्ड ने भी कैंची चला दी थी। फूलन देवी भी इस फिल्म का पुरजोर विरोध कर रही थीं, उन्होंने कई थिएटर मालिकों को धमकी भी दे डाली थी। लेकिन फिर कोर्ट के आदेश पर फिल्म को रिलीज किया गया था।   
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