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Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन के दिन भाई गलती से भी न करें ये काम, वरना भुगतना पड़ सकता है अशुभ परिणाम

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Thu, 11 Aug 2022 11:53 AM IST
रक्षाबंधन के दिन भाई गलती से भी न करें ये काम
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Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। ये पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधते हुए उनकी आरती करती हैं। साथ ही भगवान से उनके दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना करती है। वहीं भाई प्रेम रूपी इस धागे को बंधवा कर जीवन भर बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। साथ ही बहन को उपहार भी देते हैं। हिंदू धर्म में ये त्योहार सदियों से मनाया जा रहा है। ये पर्व भाई बहन अटूट प्रेम का प्रतीक है। वहीं ज्योतिष में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं, जिन्हें इस दिन भाइयों को नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं कौन से वे कार्य जिन्हें रक्षाबंधन के भाईयों को भूल कर भी नहीं करना चाहिए....   
रक्षाबंधन के दिन भाई गलती से भी न करें ये काम
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बहन का अपमान न करें 
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। बहनें इस दिन का साल भर इंतजार करती हैं। रक्षाबंधन वाले दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधे बिना कुछ खाती भी नहीं। इस दिन वे प्यार से आरती की थाली सजाती हैं। भाई की आरती उतारकर वे राखी बांधती है और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं। ऐसे में भाईयों को भी ध्यान रखना चाहिए कि गलती से भी इस दिन बहन का अपमान न करें। 
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राखी बंधवाने के बाद बहन उपहार जरूर दें 
राखी बंधवाने के बाद भाई बहन को उपहार जरूर दें। मान्यता है कि खाली हाथ बहन को लौटना शुभ नहीं होता है। साथ ही इससे राखी का शुभ परिणाम भी नहीं मिलता।  
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किसी को भी खाली हाथ न लौटाएं
रक्षाबंधन सावन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन पड़ता है। धर्म ग्रंथों में पूर्णिमा तिथि पर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में इस यदि आपके घर पर कोई भिक्षुक आ जाए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपनी इच्छा और शक्ति के अनुसार, उसे कुछ न कुछ जरूर दें। 
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ये भी करने से बचें 
इस दिन सिर्फ बहन ही नहीं बल्कि किसी भी महिला का अपमान न करें। वैसे तो कभी भी किसी भी महिला को अपशब्द नहीं कहना चाहिए। लेकिन रक्षाबंधन वाले विशेष रूप किसी भी महिला को चाहे वो परिवार की हो या कोई और उसे अपशब्द न कहें। 
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