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Aja Ekadashi 2022: कब है अजा एकादशी व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sat, 13 Aug 2022 10:58 AM IST
अजा एकादसी व्रत एवं पूजा विधि
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Aja Ekadashi 2022: भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन अजा एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल ये व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से ये व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। मान्यता है कि अजा एकादशी व्रत से मनुष्य के समस्त प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर अंत में विष्णु लोक में पहुंच जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन प्रातः उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और एकादशी की रात जागरण कर श्रीहरि विष्णु का पूजा-पाठ करना चाहिए। इस दिन पूजा से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं अजा एकादशी व्रत मुहूर्त, व्रत विधि और कथा... 
अजा एकादसी व्रत एवं पूजा विधि
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अजा एकादशी तिथि  2022
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त 2022 को सुबह 07 बजकर 02 मिनट से होगा। वहीं इस तिथि का समापन 24 अगस्त 2022 को सुबह 05 बजकर 09 मिनट पर होगा।
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अजा एकादसी व्रत एवं पूजा विधि
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पूजा की विधि
अजा एकादशी वाले दिन सुबह उठाकर स्नानादि करने के बाद भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूजा घर में या पूर्व दिशा में किसी स्वच्छ जगह पर एक चौकी पर भगवान का आसन लगाएं। उस पर एक गेहूं की ढेरी रखकर कलश में जल भरकर उसकी स्थापना करें। कलश पर पान के पत्ते लगाकर नारियल रखें और विष्णु जी की तस्वीर रखें।
अजा एकादसी व्रत एवं पूजा विधि
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इसके बाद दीपक जलाएं और फल-फूल, नैवेद्य से भगवान विष्णु की पूजा करें। दूसरे दिन सुबह को स्नानादि करने के बाद विष्णु जी की पूजा करके व्रत का पारण करें। वहीं स्थापित किए गए कलश के जल को अपने घर में छिड़क दें और बचे हुए जल को किसी पौधे या तुलसी में चढ़ा दें।
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अजा एकादसी व्रत एवं पूजा विधि
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अजा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि अजा एकादशी व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस व्रत को नियम पूर्वक करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है। 
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