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कब है अधिकमास में शुक्र प्रदोष व्रत? जानें भगवां भोलेनाथ की पूजा विधि और मुहूर्त

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Tue, 09 Jun 2026 11:18 AM IST
सार

अधिकमास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

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Pradosh Vrat June 2026 Know Shukra Pradosh Date, Puja Vidhi and Auspicious Timings
अधिक मास प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। यह व्रत हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक प्रदोष व्रत का पालन करते हैं, उन पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन के कष्टों का नाश होता है। ऐसे में अधिकमास के दौरान आने वाला यह विशेष शुक्र प्रदोष व्रत और भी अधिक फलदायी माना जा रहा है। आइए जानते हैं इस व्रत की तारीख, शुभ मुहूर्त और शिव पूजा की विधि के बारे में पूरी जानकारी।

Pradosh Vrat June 2026 Know Shukra Pradosh Date, Puja Vidhi and Auspicious Timings
अधिक मास प्रदोष व्रत - फोटो : freepik

जून प्रदोष व्रत 2026 तिथि
ज्येष्ठ अधिकमास भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है और यह विशेष माह लगभग 3 साल में एक बार आता है। इसी पवित्र अधिकमास में इस बार शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे से शुरू होकर 13 जून 2026 को शाम 04:07 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस बार प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु विधि-विधान से महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे। चूंकि यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

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अधिक मास प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock

शुक्र प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 12 जून 2026 को प्रदोष काल का शुभ समय शाम 07:36 बजे से 09:20 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।

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अधिक मास प्रदोष व्रत - फोटो : Amar Ujala

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ और साफ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • शिवलिंग या शिव परिवार की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए पूजा प्रारंभ करें।
  • शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें।
  • सफेद चंदन, अक्षत और कनेर के फूल चढ़ाएं।
  • घी का दीपक जलाकर भगवान शिव के सामने बैठें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा संपन्न करें।
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