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Taj Mahal: 125 साल पहले ऐसा दिखता था ताजमहल, लॉर्ड कर्जन ने बचाई मोहब्बत की अनमोल इमारत; ये कार्य कराए गए
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 09 Jun 2026 09:50 AM IST
सार
ताजमहल का वर्तमान स्वरूप काफी हद तक 1901 में लॉर्ड कर्जन द्वारा कराए गए संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्यों का परिणाम है, जिसमें बगीचों का पुनर्निर्माण और कई संरचनात्मक बदलाव शामिल थे। उन्होंने ताजमहल की दृश्यता सुधारने के साथ-साथ लैंप, बेंच और अन्य सजावटी तत्व भी लगवाए, जिससे इस स्मारक की भव्यता और बढ़ गई।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया के अजूबों में शुमार ताजमहल हमेशा से ऐसा नहीं था, जैसा अब सैलानी अपनी यादों में बसाए हुए हैं। 125 साल पहले ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन ने ताजमहल में संरक्षण के साथ कई ऐसे काम कराए जिनकी अब सबसे ज्यादा चर्चा होती है। ताजमहल में कर्जन ने अपने काम से न केवल इसकी सूरत बदल दी, बल्कि सेंट्रल टैंक पर संगमरमर की चार बेंच के साथ लैंप का ऐसा तोहफा दिया जो ताजमहल की शान को और बढ़ाता है।
ताजमहल
- फोटो : getty
कर्जन ने ताजमहल में उगे ऊंचे पेड़ों और झाड़ियो को कटवा कर बगीचे का ले-आउट बदल दिया और लॉन बनवाकर दृश्यता में सुधार किया। प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 के जरिये ताजमहल समेत स्मारकों के आसपास होने वाले अवैध निर्माण और तोड़-फोड़ पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
लॉर्ड कर्जन ने 1907 में लगवाई थी डायना बेंच
ताज के सेंट्रल टैंक पर संगमरमर से बनी चार बेंच हैं, जिन पर बैठकर सभी राष्ट्राध्यक्ष और हस्तियां अपने यादगार फोटो खिंचवाते हैं, उन्हें लॉर्ड कर्जन ने ही लगवाया था। पूर्व संरक्षण सहायक सर्वेश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि वर्ष 1907 में सेंट्रल टैंक पर मौजूद भद्दी कुर्सियों को हटवाकर उन्होंने संगमरमर की मुगलिया डिजाइन वाली चार बेंच रखवाईं, जहां से ताज का अनूठा अक्श पानी में नजर आता है। वर्ष 1992 में प्रिंसेज डायना जिस सीट पर बैठीं, उस बेंच का नाम डायना बेंच पड़ गया। दुनिया के 160 देशों से ज्यादा के राष्ट्राध्यक्ष यहां आकर फोटो खिंचवा चुके हैं।
ताज के सेंट्रल टैंक पर संगमरमर से बनी चार बेंच हैं, जिन पर बैठकर सभी राष्ट्राध्यक्ष और हस्तियां अपने यादगार फोटो खिंचवाते हैं, उन्हें लॉर्ड कर्जन ने ही लगवाया था। पूर्व संरक्षण सहायक सर्वेश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि वर्ष 1907 में सेंट्रल टैंक पर मौजूद भद्दी कुर्सियों को हटवाकर उन्होंने संगमरमर की मुगलिया डिजाइन वाली चार बेंच रखवाईं, जहां से ताज का अनूठा अक्श पानी में नजर आता है। वर्ष 1992 में प्रिंसेज डायना जिस सीट पर बैठीं, उस बेंच का नाम डायना बेंच पड़ गया। दुनिया के 160 देशों से ज्यादा के राष्ट्राध्यक्ष यहां आकर फोटो खिंचवा चुके हैं।
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प्रिंसेज डायना के बैठने के बाद यह डायना बेंच के नाम से चर्चित हो गई।
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य गुंबद और रॉयल गेट पर लगाया कर्जन लैंप
एएसआई के पूर्व संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित के मुताबिक लॉर्ड कर्जन जब मिस्र और काहिरा की यात्रा पर थे, तो वहां सुल्तान बैबर के मकबरे में मौजूद झूमर (लैंप) से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने काहिरा के कारीगरों से ताजमहल के मुख्य गुंबद और रॉयल गेट के लिए लैंप तैयार कराया। 16 फरवरी 1908 में इन्हें शाहजहां-मुमताज की कब्रों के ऊपर लगाया गया। इस पर फारसी में लिखा गया है कि मुमताज महल के मकबरे को लॉर्ड कर्जन की भेंट।
एएसआई के पूर्व संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित के मुताबिक लॉर्ड कर्जन जब मिस्र और काहिरा की यात्रा पर थे, तो वहां सुल्तान बैबर के मकबरे में मौजूद झूमर (लैंप) से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने काहिरा के कारीगरों से ताजमहल के मुख्य गुंबद और रॉयल गेट के लिए लैंप तैयार कराया। 16 फरवरी 1908 में इन्हें शाहजहां-मुमताज की कब्रों के ऊपर लगाया गया। इस पर फारसी में लिखा गया है कि मुमताज महल के मकबरे को लॉर्ड कर्जन की भेंट।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
कुषाण काल की तरह लगवाए खंभे
यूनाइटेड प्रॉविंस के स्मारकों के संरक्षण पर आर फॉउड ट्रकर की रिपोर्ट में बताया गया है कि लॉर्ड कर्जन ने ताजमहल के फोरकोर्ट में छह लाइटें लगवाईं। इन लाइटों को कुषाण काल में उपयोग किए गए खंभों की तरह से डिजाइन किया गया। मथुरा के म्यूजियम में कुषाण काल के अवशेष देखकर लॉर्ड कर्जन ने इन्हें तैयार करवाया था। कर्जन ने ही ताजमहल के म्यूजियम को तैयार कराया।
यूनाइटेड प्रॉविंस के स्मारकों के संरक्षण पर आर फॉउड ट्रकर की रिपोर्ट में बताया गया है कि लॉर्ड कर्जन ने ताजमहल के फोरकोर्ट में छह लाइटें लगवाईं। इन लाइटों को कुषाण काल में उपयोग किए गए खंभों की तरह से डिजाइन किया गया। मथुरा के म्यूजियम में कुषाण काल के अवशेष देखकर लॉर्ड कर्जन ने इन्हें तैयार करवाया था। कर्जन ने ही ताजमहल के म्यूजियम को तैयार कराया।