किडनी कांड की जांच में खुलासा, डोनर-रिसीवर निकले फर्जी, फर्जीवाड़े का ये है मास्टरमाइंड

सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 10 Jun 2019 02:16 PM IST
पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला
1 of 5
विज्ञापन
किडनी कांड में फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल पर भी शिकंजा कसना लगभग तय है। यहां पर फर्जीवाड़ा कर किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी थी, तभी कानपुर में बर्रा पुलिस ने पूरे रैकेट का खुलासा कर दिया था। पुलिस को अस्पताल की ट्रांसप्लांट संबंधी दो फाइलें मिली हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि फाइलों में दर्ज रिसीवर और डोनर दोनों के नाम फर्जी हैं। पुलिस कोऑर्डिनेटर के साथ ही अस्पताल प्रशासन से भी पूछताछ करने की तैयारी में है।
पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला
2 of 5
एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि पीएसआरआई हॉस्पिटल में जो केस ट्रांसप्लांट के हुए हैं, उनमें रिसीवर (जिनको किडनी ट्रांसप्लांट की गई) के नाम सही दर्ज थे। नाम व पते का सत्यापन भी हुआ था। केवल डोनर का नाम बदला गया था। बाद में वही डोनर पीड़ित के तौर पर पुलिस को मिले।
विज्ञापन
पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला
3 of 5
जांच के दौरान फोर्टिस हॉस्पिटल के किडनी ट्रांसप्लांट संबंधी दो फाइलें पुलिस को मिली थीं। इसमें एक फाइल तीरथ पाल और दूसरी अरुण कुमार की थी। दोनों का पता अलीगढ़ लिखा हुआ है। दोनों रिसीवर दिखाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक जब सत्यापन किया गया तो पता चला कि इस नाम के रिसीवर ही नहीं है। वहीं जिन डोनरों का जिक्र है वह भी नहीं मिले। यानी कि डोनर और रिसीवर दोनों ही फर्जी बनाए गए थे।

इसलिए किया फर्जीवाड़ा
पुलिस के मुताबिक डोनर-रिसीवर के नाम फर्जी होने से भविष्य में पकड़े जाने का खतरा कम रहता था। इससे डोनर और रिसीवर दोनों सुरक्षित रहते थे। इसलिए ये फर्जीवाड़ा किया गया। हालांकि पुलिस अब वहां के अधिकारियों से पूछताछ कर असल रिसीवर व डोनर तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
किडनी कांड में आरोपी डॉक्टर दीपक शुक्ला
4 of 5
फर्जीवाड़े का ये है मास्टरमाइंड
पुलिस किडनी कांड में जयपुर निवासी शैलेष सक्सेना को जेल भेज चुकी है। पुलिस के मुताबिक डोनर-रिसीवर केनाम बदलकर ट्रांसप्लांट करवाने की योजना शैलेष ने ही बनाई थी। वह पहले भी किडनी कांड में जेल जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
किडनी कांड में आरोपी डॉक्टर दीपक शुक्ला
5 of 5
दोनों का मिलना बेहद जरूरी
पुलिस के मुताबिक इन दोनों डोनर और रिसीवरों का मिलना बेहद जरूरी है। दरअसल, पुलिस डोनर को ही गवाह बनाकर पेश कर रही है। ये हॉस्पिटल के खिलाफ सबसे मजबूत साक्ष्य और गवाह हैं। पुलिस का कहना है कि कोऑर्डिनेटर से पूछताछ से इन सभी सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00