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शिवपाल का अल्टीमेटम: जल्द निर्णय करें अखिलेश, भूलें मत- नेताजी ने मुझे पढ़ाया भी है और कुश्ती भी सिखाई है

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 22 Nov 2021 06:42 PM IST
शिवपाल यादव, अखिलेश यादव
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सैफई के चांदगीराम स्टेडियम में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर आयोजित दंगल के दौरान प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को अल्टीमेटम दे दिया। कहा कि अब गठबंधन पर फैसला जल्द हो जाना चाहिए। अगर नहीं होगा तो हम लखनऊ में प्रसपा का बड़ा सम्मेलन करेंगे और अपने लोगों से राय लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

दंगल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सपा को एक हफ्ते में गठबंधन या विलय का फैसला ले लेना चाहिए। वह गठबंधन या विलय करने को तैयार हैं। अगर एक हफ्ते के अंदर ऐसा नहीं होता है तो फिर लखनऊ में सम्मेलन करके अपने लोगों से राय कर फैसला लेंगे। कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना हमारी प्राथमिकता है। नेताजी के जन्मदिन पर पूरे प्रदेश के लोग गठबंधन पर निर्णय की आस लगाए थे। अब जो भी हो जल्दी हो।
शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव
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शिवपाल सिंह ने कहा कि नेताजी ने हमको पढ़ाया भी है, कुश्ती के दांव भी सिखाए हैं। राजनीति के बारे में भी बहुत कुछ सीखा है। एकता में ताकत होती है। परिवार में बिखराव होता है तो बहुत कमियां आती हैं। प्रसपा प्रमुख ने कहा कि हम अपने समर्थकों के लिए 100 सीटें चाहते थे, लेकिन हम अब पीछे हट गए। हम ही झुक गए। आज दो साल हो गए यह बात कहे हुए, लेकिन कोई बात अभी तक फाइनल नहीं हुई।
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प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव
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शिवपाल ने कहा कि गठबंधन के साथ-साथ जो जीतने वाले लोग हैं, उनको टिकट दे दो, हम विलय के लिए तैयार हैं। समाजवादी पार्टी 303 सीटों पर लड़ ले। हम केवल 50 भी जीत जाएं तो सरकार 2022 में बन जाएगी। गठबंधन या विलय को लेकर अब बहुत देर हो रही है।

 
प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव
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2003 में बन सकते थे सीएम
प्रसपा प्रमुख ने कहा कि मैंने हमेशा त्याग किया। मैं चाहता तो साल 2003 में मुख्यमंत्री बन सकता था, लेकिन मैंने नेताजी को दिल्ली से बुलाकर मुख्यमंत्री बनवाया। दूसरी पार्टियों के 40 विधायक इकट्ठा किए थे। उस वक्त 25 विधायक भाजपा के भी हमारे साथ थे। अजीत सिंह, कल्याण सिंह भी साथ थे।

 
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शिवपाल सिंह यादव
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उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती के कार्यकाल में हमारे लोगों पर अत्याचार हुआ था। तब विपक्ष में रहते हुए उनका विरोध किया था। कई और आंदोलन किए थे। हमारे व कार्यकर्ताओं के संघर्ष से ही वर्ष 2012 में सरकार बनी थी। पहले लोग हमारे दल को छोटा दल कहते थे, लेकिन मथुरा से रथ निकलने के बाद लोगों वालों को पता लग गया है कि हमारा छोटा दल नहीं है। हमारी प्राथमिकता पर आज भी समाजवादी पार्टी है। सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इस समय देश की हालत ठीक नहीं है। भाजपा की सरकार में किसान, मजदूर, नौजवान, बुनकर सब परेशान हैं। महंगाई चरम पर है। हमारे हाथ में ताकत आई तो हर परिवार में एक बेटा या बेटी को सरकारी नौकरी मिलेगी। किसानों को खाद की कमी नहीं होगी।
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