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UP: सिविल इंजीनियर ने अपनी पत्नी को दी दर्दनाक मौत, सोते समय रेता गला; इसलिए दुपट्टे से ढक दिया लाश का चेहार
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 27 May 2026 02:27 PM IST
सार
मथुरा के मकरंदगढ़ी गांव में पति ने रात में सो रही पत्नी की हत्या कर शव का चेहरा दुपट्टे से ढक दिया। सुबह सास ने कमरे का दरवाजा खोलकर खून से लथपथ शव देखा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई।
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सिविल इंजीनियर ने अपनी पत्नी को दी दर्दनाक मौत
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के थाना नौहझील क्षेत्र के गांव मकरंदगढ़ी में सोमवार देररात एक सिविल इंजीनियर ने मामूली कहासुनी के बाद अपनी पत्नी की धारदार हथियार से गले पर वार कर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से भाग गया। मंगलवार सुबह जैसे ही घटना की जानकारी ग्रामीणों को हुई, इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच जांच पड़ताल में जुट गए हैं।
मृतका का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जानकारी सुबह परिजन को जागने पर हुई। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब सवा आठ बजे पुलिस को दी गई। सीओ संदीप सिंह, थाना प्रभारी जगदंबा सिंह और उपनिरीक्षक अशेष कुमार मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने खून से लथपथ भावना को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहझील भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए हैं। मृतका के पिता ने दामाद उमेश के खिलाफ थाने में हत्या की तहरीर दी है। पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर उमेश की तलाश में जुटी है। एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि उमेश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।
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घर पर विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हत्या कर पत्नी का चेहरा दुपट्टे से ढका
गांव मकरंदगढ़ी में नशे की लत ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। वारदात के समय घर में उमेश और भावना के अलावा उनकी वृद्ध माता मछला देवी, पिता दलवीर सिंह और 8 वर्षीय बेटा लड्डू भी थे। माता-पिता और बेटा गर्मी के कारण घर के बरामदे में सो रहे थे। पुलिस के अनुसार देर रात जब परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद में थे तभी उमेश ने कमरे में बेड पर सो रही भावना पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ दो-तीन वार किए। हत्या करने के बाद उमेश ने भावना के चेहरे को दुपट्टे से ढक दिया और कमरे के दरवाजे पर बाहर से सांकल लगाकर भाग गया। हत्याकांड का पता मंगलवार तड़के करीब 5 बजे तब चला जब मछला देवी सोकर उठीं। उन्होंने देखा कि रोज की तरह सुबह पशुओं के चारे (सानी) का इंतजाम नहीं हुआ है। उन्होंने भावना को आवाज दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वह कमरे की तरफ गईं, तो बाहर से सांकल लगी थी। उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोलकर अंदर कदम रखा देखा कि भावना बेड पर सीधी पड़ी थी और चेहरा दुपट्टे से ढका हुआ था। सास ने जैसे ही भावना के चेहरे से दुपट्टा हटाया, खून से लथपथ शव देखकर उनकी चीख निकल गई। चीख सुनकर ससुर दलवीर सिंह, मासूम लड्डू और ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने सूचना भावना के मायके वालों को दी। कुछ ही देर में मायके पक्ष के लोग पहुंच गए। भावना के बुआ के लड़के दीपक ने 112 नंबर को कॉल कर पुलिस को जानकारी दी।
गांव मकरंदगढ़ी में नशे की लत ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। वारदात के समय घर में उमेश और भावना के अलावा उनकी वृद्ध माता मछला देवी, पिता दलवीर सिंह और 8 वर्षीय बेटा लड्डू भी थे। माता-पिता और बेटा गर्मी के कारण घर के बरामदे में सो रहे थे। पुलिस के अनुसार देर रात जब परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद में थे तभी उमेश ने कमरे में बेड पर सो रही भावना पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ दो-तीन वार किए। हत्या करने के बाद उमेश ने भावना के चेहरे को दुपट्टे से ढक दिया और कमरे के दरवाजे पर बाहर से सांकल लगाकर भाग गया। हत्याकांड का पता मंगलवार तड़के करीब 5 बजे तब चला जब मछला देवी सोकर उठीं। उन्होंने देखा कि रोज की तरह सुबह पशुओं के चारे (सानी) का इंतजाम नहीं हुआ है। उन्होंने भावना को आवाज दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वह कमरे की तरफ गईं, तो बाहर से सांकल लगी थी। उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोलकर अंदर कदम रखा देखा कि भावना बेड पर सीधी पड़ी थी और चेहरा दुपट्टे से ढका हुआ था। सास ने जैसे ही भावना के चेहरे से दुपट्टा हटाया, खून से लथपथ शव देखकर उनकी चीख निकल गई। चीख सुनकर ससुर दलवीर सिंह, मासूम लड्डू और ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने सूचना भावना के मायके वालों को दी। कुछ ही देर में मायके पक्ष के लोग पहुंच गए। भावना के बुआ के लड़के दीपक ने 112 नंबर को कॉल कर पुलिस को जानकारी दी।
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पुलिस को जानकारी देते घरवाले
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नशा मुक्ति केंद्र भी ढाई माह रहा था उमेश
मकरंदगढ़ी निवासी उमेश कभी नामी कंपनी में सिविल इंजीनियर था। परिवार की उम्मीद और बुजुर्ग मां-बाप का सहारा था। शराब, भांग और गांजे के ऐसे दलदल में धंसा कि फिर कभी बाहर नहीं निकल पाया। उमेश की साल भर पहले नौकरी छूट गई। इस पर भी भावना ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पति की हर कड़वी बात को सिर्फ इस उम्मीद में सहा कि शायद उसका सुहाग एक दिन सुधर जाएगा। भावना की मिन्नतों के बाद परिजन ने उमेश को मथुरा के एक नशा मुक्ति केंद्र में ढाई महीने तक रखा था। जब वह लौटा, तो भावना की आंखों में सुहाग के सुधरने की किरण जागी भी लेकिन बदकिस्मती से उमेश फिर उसी अंधेरे रास्ते पर चल पड़ा। घर में रोज कलह होती। भावना उमेश को हर बार अपने बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की कसम देती, लेकिन नशे में उमेश को कुछ दिखाई नहीं दिया। आज से 13 साल पहले थाना राया के गांव नगला सहसू निवासी दो सगी बहनों की डोली एक साथ उठी थी। बड़ी बहन भावना की शादी उमेश से और छोटी बहन प्रियंका की शादी छोटे भाई सुनील से हुई थी। सुनील दिल्ली में प्रियंका के साथ रहता है। इस वारदात ने दो मासूम बच्चों के सिर से मां का आंचल छीन लिया है। उमेश का बड़ा बेटा 11 साल का अभिषेक अपने चाचा के साथ दिल्ली में रहता है जबकि 8 साल का लड्डू गांव में रहता है।
मकरंदगढ़ी निवासी उमेश कभी नामी कंपनी में सिविल इंजीनियर था। परिवार की उम्मीद और बुजुर्ग मां-बाप का सहारा था। शराब, भांग और गांजे के ऐसे दलदल में धंसा कि फिर कभी बाहर नहीं निकल पाया। उमेश की साल भर पहले नौकरी छूट गई। इस पर भी भावना ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पति की हर कड़वी बात को सिर्फ इस उम्मीद में सहा कि शायद उसका सुहाग एक दिन सुधर जाएगा। भावना की मिन्नतों के बाद परिजन ने उमेश को मथुरा के एक नशा मुक्ति केंद्र में ढाई महीने तक रखा था। जब वह लौटा, तो भावना की आंखों में सुहाग के सुधरने की किरण जागी भी लेकिन बदकिस्मती से उमेश फिर उसी अंधेरे रास्ते पर चल पड़ा। घर में रोज कलह होती। भावना उमेश को हर बार अपने बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की कसम देती, लेकिन नशे में उमेश को कुछ दिखाई नहीं दिया। आज से 13 साल पहले थाना राया के गांव नगला सहसू निवासी दो सगी बहनों की डोली एक साथ उठी थी। बड़ी बहन भावना की शादी उमेश से और छोटी बहन प्रियंका की शादी छोटे भाई सुनील से हुई थी। सुनील दिल्ली में प्रियंका के साथ रहता है। इस वारदात ने दो मासूम बच्चों के सिर से मां का आंचल छीन लिया है। उमेश का बड़ा बेटा 11 साल का अभिषेक अपने चाचा के साथ दिल्ली में रहता है जबकि 8 साल का लड्डू गांव में रहता है।
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पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मां की तस्वीर सीने से चिपकाकर रो पड़े मासूम अभिषेक और लड्डू
मां भावना की हत्या के बाद 11 वर्षीय अभिषेक और 8 वर्षीय लड्डू का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों मासूमों की समझ में नहीं आ रहा है कि जिस पिता की उंगली पकड़कर उन्होंने चलना सीखा, उसी पिता ने उनके ममता के आंचल को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। बड़ा बेटा अभिषेक जैसे ही दिल्ली से रोता-बिलखता गांव पहुंचा, छोटा भाई लड्डू उससे लिपट गया। लड्डू मां की तस्वीर सीने से चिपकाए हुए बार-बार रोते हुए कह रहा था, भैया अब हमें सुबह प्यार से कौन जगाएगा, हमारी पसंद का खाना कौन बनाएगा और रात को चंदा मामा की कहानी कौन सुनाएगा।
मां भावना की हत्या के बाद 11 वर्षीय अभिषेक और 8 वर्षीय लड्डू का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों मासूमों की समझ में नहीं आ रहा है कि जिस पिता की उंगली पकड़कर उन्होंने चलना सीखा, उसी पिता ने उनके ममता के आंचल को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। बड़ा बेटा अभिषेक जैसे ही दिल्ली से रोता-बिलखता गांव पहुंचा, छोटा भाई लड्डू उससे लिपट गया। लड्डू मां की तस्वीर सीने से चिपकाए हुए बार-बार रोते हुए कह रहा था, भैया अब हमें सुबह प्यार से कौन जगाएगा, हमारी पसंद का खाना कौन बनाएगा और रात को चंदा मामा की कहानी कौन सुनाएगा।