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संजय गढ़वी
सुन सिनेमा

जॉन अब्राहम नहीं थे फिल्म धूम के लिए पहली पसंद, ऐसे मिली फिल्म

5 July 2022

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4:24
दोस्तों आज बात करेंगे 2004 में आई एक्शन थ्रिलर फिल्म धूम की जिसे निर्देशित किया था संजय गढ़वी ने और निर्माता थे यशराज फिल्म्स यानी आदित्य चोपड़ा. धूम की कहानी लिखी थी विजय कृष्ण आचार्य ने और सुरों से सजाया था प्रीतम दा ने... धूम की बैकग्राउंड संगीत काफी मशहूर हुआ था जिसे तैयार किया था सलीम सुलेमान ने...फिल्म की कास्ट की बात करें तो इसमें अभिषेक बच्चन, जॉन अब्राहम, उदय चोपड़ा, ईशा देओल और रिमी सेन नजर आए थे। यह धूम फ्रेंचाइजी की पहली किस्त थी..लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म से शोहरत की ऊंचाइयों को छूने वाले जॉन अब्राहम इसका हिस्सा नहीं थे..जब दो अभिनेताओं ने फिल्म ठुकराई तब जाकर जॉन के हिस्से में फिल्म आई. फिल्म ने जॉन अब्राहम को युवा पीढ़ी के बीच एक स्टार बना दिया था। उनका लंबे बालों वाला लुक भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को भी इतना भाया कि उन्होंने भी अपने बाल जॉन की तरह रख लिए.. तो चलिए सुनाते हैं धूम से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें...  

जॉन अब्राहम नहीं थे फिल्म धूम के लिए पहली पसंद, ऐसे मिली फिल्म

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सभी 386 एपिसोड

दोस्तों आज बात करेंगे उस शख्सियत की जिसने करीब चार दशक तक बॉलीवुड को नचाया...मेरा मतलब है अभिनेताओं-अभिनेत्रियों को नचाया...सच कहा जाए तो उन्होंने कोरियोग्राफी को एक अलग आयाम दिया...जी हां...हम बात कर रहे हैं सरोज खान की...हम उनकी निजी जिंदगी के बारे में बात नहीं करेंगे और उनकी प्रोफेशनल लाइफ की ही बात करेंगे...और बताएंगे कि किस अभिनेत्री के साथ उन्होंने कभी काम न करने की कसम खा ली थी...किस संगीत पर उन्हें नाचने और नचाने में डर लगता था और किस अभिनेता को नचाने में उनके पसीने छूट जाते थे...सरोज खान वैसे तो फिल्म में बाल कलाकार के तौर पर सबसे पहले दिखाई दी थीं...डांस अच्छा कर लेने की वजह से ग्रुप डांसर बन गई...1958 में आई फिल्म हावड़ा ब्रिज में मधुबाला पर फिल्माए गए गाने आइए मेहरबां पर उन्होंने पहली बार ग्रुप डांस किया था.....जिसमें वो लड़के के गेटअप में थीं और एक लड़की से साथ ग्रुप डांस कर रही थीं...वैसे तो सरोज ने इंडस्ट्री के लगभग सभी अभिनेताओं को नचाया होगा लेकिन उनके पसंदीदा अभिनेताओं में गोविंदा, मिथुन, आमिर खान टॉप पर थे...
 

आज हिंदुस्तान के उस बेशकीमती खजाने के बात करूंगी जिन्हें आप और हम लता मंगेशकर के नाम से जानते हैं। दोस्तों ये वो पर्सनैलिटी हैं जिनकी खासियत पर जितना बोला जाए उतना कम है। स्वर कोकिला के नाम से मशहूर लता ताई को हिंदुस्तान की आवाज कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उनकी जुबां पर जैसे साक्षात सरस्वती विराजती हैं। मगर ये बात तो बेहद कम ही लोग जानते हैं कि लता मंगेशकर गाने के साथ साथ एक्टिंग भी किया करती थीं। 

दोस्तों किसी भी फिल्म में जितनी अहम भूमिका नायक की होती है, उतना ही अहम किरदार खलनायक का भी होता है। हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक खलनायक हुए हैं, लेकिन जब बात खलनायिकाओं की होती है तब नाम लिया जाता है मशहूर अभिनेत्री अरुणा ईरानी का। उन्होंने 500 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। अरुणा ईरानी का जन्म 18 अगस्त 1946 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने साल 1961 में फिल्म 'गंगा जमुना' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। 

दोस्तों आप पूजा भट्ट को तो जानते ही होंगे...मशहूर निर्माता निर्देशक महेश भट्ट की बेटी और आलिया भट्ट की बड़ी बहन पूजा कभी मशहूर अभिनेत्री हुआ करती थीं...एक वक्त था जब पूजा भट्ट फिल्मी परदे पर राज कर रहीं थीं और आमिर खान जैसे कई बड़े एक्टरों के साथ भी उनकी केमेस्ट्री खूब जम रही थी, लेकिन धीरे-धीरे पूजा भट्ट के करियर ग्राफ में गिरावट आने लगी और वो एक्टिंग से दूर हो गईं। इसकी बड़ी वजह बनी उनकी पर्सनल लाइफ। अपने करियर से ज्यादा पूजा भट्ट अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में रहने लगीं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित रहा रणवीर शौरी के साथ पूजा भट्ट का अफेयर।

फिल्मों में आपने ये डायलॉग तो जरूर सुना होगा...भागने की कोशिश मत करना...हमने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है...भलाई इसी में है कि तुम अपने आप को कानून के हवाले कर दो...कुछ याद आया...जी हां..हिंदी फिल्मों में लगभग हर पुलिसवाले की जुबान से ये सुनने को मिल ही जाता था...इस डायलॉग को सुनकर एक जो तस्वीर सामने उभरकर आती है वो हैं इफ्तिखार...सिने प्रेमी अभिनेता इफ्तिखार को पुराने जमाने की फिल्मों में पुलिसवाले की अनगिनत भूमिकाओं के लिए बखूबी जानते हैं...लेकिन क्या आप जानते हैं कि इफ्तिखार एक अच्छे कलाकार के साथ-साथ अच्छे गायक और पेंटर भी थे...हम आज इन्हीं की जिंदगी के बारे में बात करेंगे कि कैसे वो एक अच्छी खासी नौकरी छोड़कर मनोरंजन की दुनिया में आगे बढ़े...

'है प्रीत जहां की रीत सदा.. मै गीत वहां के गाता हूं भारत का रहने वाला हूं.. भारत की बात सुनाता हूं।'' ये गीत शायद ही किसी ने न सुना हो, देशभक्ति से लबरेज फिल्मों में अभिनय करने वाले मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार को कौन नहीं जानता। मनोज कुमार यानी हरिकिशन गिरी गोस्वामी। जी हां, यही था मनोज कुमार का असली नाम। तो आज बात होगी है अपने जमाने के मशहूर अभिनेता मनोज कुमार की...
 

यह महज़ ख़्याल ही नहीं, बल्कि मोहब्बत की एक इबारत है, जो जवां दिलों में ख़्वाहिश बनकर आज भी सांसे ले रही है और इस गीत को मुकेश साहब ने अपनी जादुई आवाज़ से अमर बना दिया। अब कभी-कभी नहीं, बल्कि प्यार में डूबे हर शख़्स के दिल में यह ख़्याल हमेशा के लिए मकाम कर गया है।  मुकेश साहब की रूहानी आवाज़ हमारे कानों से जुदा होने को आज भी तैयार नहीं होती। उनके गीतों में मिठास ऐसी कि जितना भी सुनो, जी नहीं भरता। कहते हैं बॉलीवुड में सभी गायकों का गाना गाने का एक ख़ास अंदाज़ होता था और गाने के मूड के हिसाब से गायक का चुनाव होता था, लेकिन मुकेश साहब के साथ इस तरह का कोई बंधन नहीं रहा। प्रेमिका की प्रशंसा हो या प्यार का इज़हार, मोहब्बत का ग़म हो या ज़िंदगी के मायने, हर हालात को मुकेश साहब की दिलकश आवाज़ ने ज़िंदा कर दिया।

दोस्तों आज बात होगी उनकी,जिन्हें हिंदी फिल्मों का पहला सुपरस्टार कहा जाता है...जी हां हम बात कर रहे हैं अशोक कुमार की...क्या आप जानते हैं कि अशोक कुमार को कैसे किस्मत ने अभिनेता बता दिया था...वक्त जाया न करते हुए करते हैं कहानी की शुरुआत...अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था....40 और 50 के दशक में हीरो बनकर, फिर चरित्र किरदार कर अशोक कुमार ने दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया...अशोक कुमार एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पेंटर थे...साथ ही वो होम्योपैथी की प्रैक्टिस भी किया करते थे...उनका अभिनेता बनने का कोई इरादा नहीं था और बॉम्बे टॉकीज में लैब असिस्टेंट की नौकरी कर रहे थे...वो कहते हैं न कि अगले पल आपकी जिंदगी में क्या होने वाला है वो किसी को नहीं पता होता है...उनके फिल्मों में आने की कहानी शुरू हुई 1935 में आई फिल्म जवानी की हवा से...

दोस्तों भारतीय फिल्म संगीत अनेक सुनहरे पड़ावों से गुजरा है। 'आलम आरा' पहली बोलती हुई फिल्म थी। लेकिन इससे पहले भी फिल्मों में संगीत था। बेशक यह पार्श्व संगीत नहीं था। फिल्म के पर्दे पर चलते चित्रों के मुताबिक साजिंदे संगीत बजाया करते थे। वह फिल्म के पर्दे के निकट बैठे होते थे। तबला, हारमोनियम और सारंगी बजती। लोग पास में ही बज रहे इस संगीत का मजा लेते थे और उनकी नजरें फिल्म के परदे पर होती थीं।

संगीता बिजलानी और सलमान खान ने 1986 में एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया था। दोनों का रिश्ता करीब 10 साल तक चला और बात शादी तक भी पहुंच गई थी। लेकिन शादी के कार्ड छपने के बाद संगीता ने सलमान के साथ अपना रिश्ता तोड़ लिया था...

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