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फिल्म दीवार के जिस सीन को करने से डर रहे थे अमिताभ, उसी ने चमका दी किस्मत

2 July 2022

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दोस्तों आज बात करेंगे 1975 में आई क्राइम ड्रामा फिल्म दीवार की. फिल्म के निर्माता गुलशन राय थे और निर्देशित किया था यश चोपड़ा ने. मुख्य भूमिकाओं में थे शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, नीतू सिंह, निरूपा रॉय और परवीन बाबी. फिल्म दीवार की पटकथा, कहानी और संवाद सलीम-जावेद ने लिखे गए थे। ये फिल्म 1961 में आई दिलीप कुमार की फिल्म गंगा जमना से प्रेरित थी...सलीम जावेद ने 18 दिनों में दीवार की  स्क्रिप्ट लिखी थी। वहीं अमिताभ बच्चन की भूमिका बंबई के मशहूर स्मगलर हाजी मस्तान पर आधारित थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के छोटे भाई का किरदार निभाने वाले शशि कपूर असल में उनसे चार साल बड़े थे। तो चलिए कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें बताते हैं फिल्म दीवार के बारे में...

फिल्म दीवार के जिस सीन को करने से डर रहे थे अमिताभ, उसी ने चमका दी किस्मत

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दोस्तों आज बात होगी उनकी,जिन्हें हिंदी फिल्मों का पहला सुपरस्टार कहा जाता है...जी हां हम बात कर रहे हैं अशोक कुमार की...क्या आप जानते हैं कि अशोक कुमार को कैसे किस्मत ने अभिनेता बता दिया था...वक्त जाया न करते हुए करते हैं कहानी की शुरुआत...अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था....40 और 50 के दशक में हीरो बनकर, फिर चरित्र किरदार कर अशोक कुमार ने दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया...अशोक कुमार एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पेंटर थे...साथ ही वो होम्योपैथी की प्रैक्टिस भी किया करते थे...उनका अभिनेता बनने का कोई इरादा नहीं था और बॉम्बे टॉकीज में लैब असिस्टेंट की नौकरी कर रहे थे...वो कहते हैं न कि अगले पल आपकी जिंदगी में क्या होने वाला है वो किसी को नहीं पता होता है...उनके फिल्मों में आने की कहानी शुरू हुई 1935 में आई फिल्म जवानी की हवा से...

दोस्तों भारतीय फिल्म संगीत अनेक सुनहरे पड़ावों से गुजरा है। 'आलम आरा' पहली बोलती हुई फिल्म थी। लेकिन इससे पहले भी फिल्मों में संगीत था। बेशक यह पार्श्व संगीत नहीं था। फिल्म के पर्दे पर चलते चित्रों के मुताबिक साजिंदे संगीत बजाया करते थे। वह फिल्म के पर्दे के निकट बैठे होते थे। तबला, हारमोनियम और सारंगी बजती। लोग पास में ही बज रहे इस संगीत का मजा लेते थे और उनकी नजरें फिल्म के परदे पर होती थीं।

संगीता बिजलानी और सलमान खान ने 1986 में एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया था। दोनों का रिश्ता करीब 10 साल तक चला और बात शादी तक भी पहुंच गई थी। लेकिन शादी के कार्ड छपने के बाद संगीता ने सलमान के साथ अपना रिश्ता तोड़ लिया था...

दोस्तों हमने कई खलनायकों का जिक्र आपसे किया है लेकिन आज की कहानी खलनायिका की है...आज बात होगी अपने जमाने की मशहूर अदाकारा मनोरमा की...वैसे तो बॉलीवुड में नादिरा, ललिता पवार, बिंदु जैसी खलनायिकाओं ने परिवारों में खूब आग लगाने का काम किया और दर्शकों से खूब गालियां भी खाईं लेकिन मनोरमा एक ऐसी अत्याचारी खलनायिका थीं जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया भी...लोग उनकी शक्ल देखकर ही हंसने लगते थे... कुछ याद आया...वही सीता और गीता वाली चाची जिनकी भाव-भंगिमाएं ही निराली थीं....अदाकारी के दौरान जिस तरह से वो आंखें और मुंह मटकाती थीं ऐसा शायद ही दुनिया में कोई कर सकता हो....मनोरमा अक्सर एक अत्याचारी चाची या सौतेली मां की भूमिका निभाती थी, जो पूरे मेकअप में रहती थीं और गुस्से में आंखें और मुंह बना ही रहता था..

तब्बू को बॉलीवुड की सबसे संजीदा हीरोइन माना जाता है। तीन दशकों से भी ज़्यादा वक्त से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय है। हाल ही में आपने ने उन्हें फिल्म भूल भुलैया 2 में देखा होगा. उनके चार्म और सुंदरता को देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये हीरोइन उम्र के इस पड़ाव पर है। 1980 से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहीं तब्बू ने अपने अब तक के करियर में तरह-तरह के किरदार निभाए और पॉप्युलैरिटी बटोरी। फिल्मी बैकग्राउंड होने की वजह से तब्बू का रुझान बचपन से ही फिल्मों की तरफ था यही वजह थी काफी कम उम्र में ही उन्होंने फिल्मों में एंट्री ले ली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी एक्टिंग का ऐसा लोहा मनवाया कि सभी देखते रह गए।

दोस्तों आज बात होगी 1997 में आई एक्शन ड्रामा फिल्म विरासत की जिसे निर्देशित किया था प्रियदर्शन ने और मुख्य भूमिकाओं में थे अनिल कपूर, तब्बू, अमरीश पुरी, पूजा बत्रा, मिलिंद गुनाजी और गोविंद नामदेव हैं। फिल्म की कहानी मशहूर अभिनेता कमल हासन ने लिखी गई थी और तमिल फिल्म थेवर मगन की सफलता के बाद इसे हिंदी में विरासत के नाम से दोबारा बनाया गया। मुशीर-रियाज की जोड़ी ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था और संगीत अनु मलिक और एस पी वेंकटेश ने तैयार किया गया था....फिल्म विरासत से हिंदी सिनेमा में निर्देशक प्रियदर्शन ने वापसी की थी...इस फिल्म को तब्बू की बेहतरीन अदाकारी के लिए भी जाना जाता है...तो चलिए सुनाते हैं फिल्म विरासत से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें....
 

दोस्तों आज की कहानी है ट्रैजेडी किंग दिलीप कुमार और अपने जमाने की मशहूर अदाकारा सायरा बानो की...बताएंगे कैसे जुबली कुमार यानि राजेंद्र कुमार से सायरा बानो का अफेयर चला और किस तरह सायरा की मां नसीम बानो राजेंद्र कुमार और अपनी बेटी के बीच दिलीप कुमार को लेकर आईं....भले ही शादी के बाद सायरा ये कहने लगीं कि यूसुफ साहब यानि दिलीप कुमार उन्हें कायनात से तोहफे में मिले हैं लेकिन उनकी पहली मोहब्बत कोई और था....दरअसल दिलीप साहब तो मधुबाला के प्यार में इस कदर दीवाने थे कि उन्हें किसी दूसरी खातून के बारे में सोचना भी गंवारा नहीं था...लेकिन उनके ख्वाब देखने वाली खातूनों में सायरा बानो भी एक थीं...सायरा बानो गुजरे जमाने की अदाकारा नसीम बानो की बेटी हैं...हालांकि सायरा की पढ़ाई-लिखाई लंदन में हुई लेकिन उन्होंने मां के नक्शे कदम पर चलते हुए फिल्मों में अभिनय को अपने करियर के तौर पर चुना...सायरा की दिली तमन्ना था कि दिलीप साहब उनके साथ किसी फिल्म में काम करें...वहीं दिलीप कुमार अक्सर उनके साथ फिल्मों में काम करने से बचते थे....उन्हें लगता था कि 21 साल छोटी सायरा के सामने वो बहुत बड़े लगेंगे और जिस लड़की को बचपन से बड़ा होते हुए देखा है उसके हीरो वह कैसे हो सकते हैं....खैर बाद में सायरा और दिलीप साहब की कई फिल्में आईं...अब चलते हैं दिलीप साहब और सायरा की शादी की कहानी पर...कैसे अचानक दोनों की शादी हो गई...

धर्मेंद्र बॉलीवुड में बेशक ही-मैन के नाम से मशहूर रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी भी किसी भी को-स्टार या निर्माता-निर्देशक के साथ बद्तमीजी नहीं और ना ही कभी ऐसे चर्चे सुनने में आए। लेकिन एक बार कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने एक्टर संजय खान को जोरदार तमाचा जड़ दिया था। संजय खान की उस बद्दतमीजी पर धर्मेंद्र ने जो चांटा मारा उस पर फिरोज खान चौंके नहीं बल्कि उन्होंने कहा, 'मेरा भाई इसी लायक है।' आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से धर्मेंद्र ने संजय खान को चांटा मारा ?

साल 1985 में राज कपूर की फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' रिलीज हुई थी। इस फिल्म से एक एक्ट्रेस रातों रात सिनेमा की दुनिया में छा गईं। जिनका नाम था यास्मीन जोसेफ यानी मंदाकिनी। 'राम तेरी गंगा मैली' में मंदाकिनी ने कई बोल्ड सीन दिए जिसने उन्हें आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया, हालांकि जिस तेजी से उन्होंने सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं उतनी ही जल्दी वो इंडस्ट्री से गायब भी हो गईं।  मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को यूपी के मेरठ में हुआ था। मंदाकिनी के पिता जोसेफ ब्रिटिश थे जबकि उनकी मां मुस्लिम थीं। उनका दूर-दूर तक फिल्मों से कोई नाता नहीं था। हालांकि मन में ऐक्ट्रेस बनने का ख्वाब जरूर पल रहा था।

दोस्तों आज बात करेंगे उस फिल्म की जिसके बाद आमिर खान ने फिल्मफेयर अवार्ड समारोह में शामिल होना बंद कर दिया था. जी हां 1995 में आई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म  रंगीला की, जिसके निर्माता और निर्देशक राम गोपाल वर्मा है और कहानी भी उन्हीं ने ही लिखी... रंगीला में आमिर के अलावा उर्मिला मातोंडकर और जैकी श्रॉफ भी मुख्य किरदारों में थे। यह फिल्म एआर रहमान की पहली हिंदी फिल्म थी, जिसमें मूल स्कोर और साउंडट्रैक था, क्योंकि उनकी पिछली हिंदी रिलीज़ उनकी तमिल, मलयालम और तेलुगु फिल्मों के डब संस्करण थे..फिल्म का संगीत एआर रहमान की मां करीमा ने सितंबर 1995 में लॉन्च किया था। रंगीला नेपाली सिनेमाघरों में सबसे लंबे समय तक चलने वाली एकमात्र फिल्म है। जब यह काठमांडू के एक बड़े थिएटर से हटाई गई, तो लोगों ने इसका विरोध किया और इसे फिर से चलाने के लिए वापस ले आए। करीब साढ़े तीन करोड़ में बनी रंगीला ने करीब 34 करोड़ रुपये का कारोबार किया था...और सात फिल्मफेयर अवार्ड अपने नाम किए थे... तो चलिए आज सुनाते हैं फिल्म रंगीला से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से...

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