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कबीर वाणी
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कबीर वाणीः मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार

12 August 2022

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2:17
मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार । फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार । कबीरदास जी कहते हैं बगीचे में जब कलियां माली को आकर देखती है तब आपस में बातचीत करती है कि माली आज फूल को तोड़ कर ले कर गया फिर कल हमारी भी बारी आएगी।कबीर दास जी यह समझाना चाहते हैं कि आज आप जवान हैं तो कल आप  भी बुड्ढे हो जाओगे , और मिट्टी में भी मिल जाओगे।

कबीर वाणीः मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार

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ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग ।
प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत ।

अब तक जो समय गुजारा है वो व्यर्थ गया, ना कभी सज्जनों की संगति की और ना ही कोई अच्छा काम किया। प्रेम और भक्ति के बिना इंसान पशु के समान है और भक्ति करने वाला इंसान के ह्रदय में भगवान का वास होता है।
 

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाए
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए।

कबीर दस जी कहते हैं कि परमात्मा तुम मुझे इतना दो कि जिसमें बस मेरा गुजरा चल जाए,मैं खुद भी अपना पेट पाल सकूं और आने वाले मेहमानों को भी भोजन करा सकूं... 

कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी ।
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पांव पसारी ।

कबीर दास जी हमें कहते हैं, कि, तू हमेशा सोया क्यों रहता है, उठकर भगवान को याद कर,उनकी आराधना कर, एक दिन ऐसा आएगा जब तू लंबे समय तक सोया ही रह जाएगा

शब्द दुरिया न दुरै, कहूं जो ढोल बजाय |
जो जन होवै जौहोरी, लेहैं सीस चढ़ाय ||

कबीर की वाणी है की शबद (ईश्वर की महिमा) किसी के दूर करने से नहीं छिप सकती है। जो शबद के पारखी होते हैं वो गुरु के वचनों को अपने सर माथे पर धर लेते हैं, उसका मोल समझ कर उसे उचित महत्त्व देते हैं
 

निंदक नियेरे राखिये, आंगन कुटी छावायें 
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुहाए 

कबीर दास जी कहते हैं कि निंदक हमेशा दूसरों की बुराइयां करने वाले लोगों को अपने पास रखतें हैं , क्योंकि ऐसे लोग अगर पास रहेंगे तो आपकी बुराइयां आपको बताते रहेंगे।  

क्या भरोसा देह का, बिनस जात छिन मांह ।
साँस-साँस सुमिरन करो और यतन कुछ नांह ॥

इस शरीर का क्या विश्वास है यह तो पल-पल मिटता हीं जा रहा है इसीलिए अपने हर सांस पर हरी का सुमिरन करो और दूसरा कोई उपाय नहीं है 
 

अवगुण कहूं शराब का, आपा अहमक़ साथ ।
मानुष से पशुआ करे, दाय गाँठ से खात ॥

मैं तुमसे शराब की बुराई करता हूं कि शराब पीकर आदमी आप पागल होता है, मूर्ख और जानवर बनता है और जेब से रकम भी लगती है सो अलग ।

मांगन मरण समान है, मति मांगो कोई भीख ।
मांगन ते मरना भला, यही सतगुरु की सीख ॥

मांगना मरने के बराबर है इसलिए किसी से भीख मत मांगो । सतगुरु की यही शिक्षा है की मांगने से मर जाना बेहतर है अतः प्रयास यह करना चाहिये की हमे जो भी वस्तु की आवश्यकता हो उसे अपने मेहनत से प्राप्त करें न की किसी से मांगकर ।

शीलवन्त सबसे बड़ा, सब रतनन की खान ।
तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन ॥

जो शील स्वभाव का होता है मानो वो सब रत्नों की खान है क्योंकि तीनों लोकों की माया शीलवन्त व्यक्ति में ही निवास करती है.

वैद्य मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार ।
एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार ॥

कबीरदास जी कहते हैं कि बीमार मर गया और जिस वैद्य का उसे सहारा था वह भी मर गया । यहाँ तक कि कुल संसार भी मर गया लेकिन वह नहीं मरा जिसे सिर्फ राम का आसरा था । अर्थात राम नाम जपने वाला हीं अमर है 

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